पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी और साध्वी भगवती सरस्वती जी बैंकाक प्रवास पर पहुंचे, जहाँ स्वर्णभूमि एयरपोर्ट से ही उन्हें भारतीय संस्कृति की आध्यात्मिक छवि का सजीव अनुभव हुआ। स्थानीय लोगों और राजपरिवार ने दोनों संतों का हार्दिक स्वागत किया। नवरात्रि, रथयात्रा, मंदिर परंपराओं और संस्कृत मंत्रों के माध्यम से थाई समाज में भारतीय संस्कृति की गहरी छाप स्पष्ट दिखाई देती है।
पूज्य स्वामी जी ने कहा कि थाई लोगों ने भारतीय संस्कृति को न केवल अपनाया है, बल्कि अपने दिलों में संरक्षित भी रखा है। साध्वी जी ने उल्लेख किया कि बैंकाक में डेस्टिनेशन वेडिंग्स की बढ़ती लोकप्रियता के बीच उत्तराखंड को भी वैश्विक वेडिंग डेस्टिनेशन बनाया जा सकता है।
साध्वी भगवती सरस्वती जी ने बताया कि बैंकाक में लगभग 80 प्रतिशत होटल डेस्टिनेशन वेडिंग्स से भरे हुए हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि उत्तराखंड, जो स्वयं भगवान शिव की पावन भूमि है और जहाँ प्रकृति का अनुपम वैभव है, उसे भी विश्वस्तरीय डेस्टिनेशन वेडिंग हब के रूप में विकसित किया जा सकता है।
इस दौरान पटेल परिवार ने पूज्य स्वामी जी और साध्वी जी को तेजस और जानकी के विवाह समारोह में आमंत्रित किया। यह परिवार भारतीय संस्कृति और सेवा भाव से गहरे रूप से जुड़ा हुआ है। लगभग 46 वर्ष पूर्व पीट्सबर्ग (अमेरिका) में पूज्य स्वामी जी की प्रेरणा से निर्मित हिंदू–जैन मंदिर के निर्माण में तथा अब उसके शिखर–निर्माण में भी पटेल परिवार की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
पटेल परिवार द्वारा विशेष आमंत्रण पर पहुंचे स्वामी जी ने बैंकाक में भारतीय अध्यात्म, भक्ति और सांस्कृतिक एकात्मता को मानव हृदयों में धड़कती दिव्य धारा बताया।
Reported By: Arun Sharma












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