खेल-खेल में टॉफी की जगह पिन निगल लेने से 16 वर्षीय बच्चे की जान खतरे में पड़ गई। सांस की नली में पिन फंसने से उसे तेज दर्द, खांसी और सांस लेने में गंभीर परेशानी होने लगी। परिजन उसे लेकर एम्स ऋषिकेश पहुंचे, जहां समय रहते विशेषज्ञ चिकित्सकों ने जटिल प्रक्रिया के जरिए उसकी जान बचा ली।
बिजनौर निवासी यह बच्चा एम्स की पीडियाट्रिक इमरजेंसी में गंभीर हालत में लाया गया था। जांच में पता चला कि नोटिस बोर्ड में इस्तेमाल होने वाली एक पिन उसके दाहिने ब्रॉन्कस (श्वास नली) में फंसी हुई है, जिससे सांस की नली अवरुद्ध हो गई थी। स्थिति को देखते हुए तत्काल ब्रोंकोस्कोपी का निर्णय लिया गया।
संस्थान की कार्यकारी निदेशक प्रो. मीनू सिंह के मार्गदर्शन में मल्टी डिसिप्लिनरी मेडिकल टीम गठित की गई। इस जटिल प्रक्रिया का नेतृत्व एडल्ट इंटरवेंशनल पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. मयंक मिश्रा ने किया। पीडियाट्रिक सर्जरी, पीडियाट्रिक पल्मोनरी और एनेस्थीसिया विभाग के विशेषज्ञों के सहयोग से रिजिड ब्रोंकोस्कोपी के जरिए बेहद सावधानीपूर्वक पिन को बाहर निकाला गया।
चिकित्सा अधीक्षक प्रो. बी सत्या ने बताया कि जोखिम भरे इस प्रोसीजर में डॉक्टरों की टीम पूरी तरह सफल रही। बच्चे को दो दिन तक निगरानी में रखने के बाद स्वस्थ हालत में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। प्रो. मीनू सिंह ने पूरी टीम के समन्वित प्रयास और तत्परता की सराहना की।
Reported By: Arun Sharma













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