भारत की लगभग 15 दिवसीय विविधतापूर्ण यात्रा के समापन पर रशियन प्रतिनिधिमंडल ने हिमालय की गोद में, माँ गंगा के पावन तट पर स्थित विश्वविख्यात परमार्थ निकेतन आश्रम में आत्मिक और भावनात्मक विराम लिया। यह प्रवास उनके लिए केवल ठहराव नहीं, बल्कि शांति, साधना, सांस्कृतिक संवाद और गहन आध्यात्मिक अनुभूति का अनुभव बना।
परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती महाराज के सान्निध्य में प्रतिनिधिमंडल ने जीवन, सेवा, करुणा और सकारात्मक दृष्टिकोण पर आधारित प्रेरक संवाद सुना। स्वामी जी ने कहा कि आज की वैश्विक चुनौतियों का समाधान बाहरी विकास में नहीं, बल्कि आंतरिक जागरूकता, करुणा और “वसुधैव कुटुम्बकम्” की भावना में निहित है। उन्होंने माँ गंगा की स्वच्छता, पवित्रता और संरक्षण को संपूर्ण मानवता की सामूहिक जिम्मेदारी बताया।
रशियन प्रतिनिधिमंडल ने साझा किया कि भारत यात्रा के दौरान कई ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थलों के दर्शन किए, लेकिन परमार्थ निकेतन में मिली आत्मिक शांति और दिव्यता उनकी यात्रा का सबसे भावनात्मक पड़ाव रहा। दल प्रमुख मिखाइल अस्लोव ने कहा कि स्वामी जी के मार्गदर्शन से उन्हें जीवन के उद्देश्य, अर्थ और चुनौतियों से निपटने की दिशा पर स्पष्टता मिली।
इस अवसर पर परमार्थ निकेतन की ओर से प्रतिनिधिमंडल को स्मृति-चिह्न स्वरूप रुद्राक्ष का पौधा भेंट किया गया और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की गई। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि यह अनुभव उनके जीवन-दृष्टिकोण में सकारात्मक और स्थायी परिवर्तन लेकर आया है।
Reported By: Arun Sharma












Discussion about this post