विश्व विटिलिगो (सफेद दाग) दिवस के अवसर पर Himalayan Institute of Medical Sciences (हिम्स) की ओर से विशेष जागरूकता अभियान आयोजित किया गया। कार्यक्रम के दौरान अस्पताल आने वाले मरीजों और उनके परिजनों को सफेद दाग से जुड़ी भ्रांतियों, इसके लक्षणों तथा आधुनिक उपचार विकल्पों की जानकारी दी गई।
त्वचा रोग विभाग की ओपीडी में आयोजित कार्यक्रम में विभागाध्यक्ष Dr. Rashmi Jindal ने कहा कि समाज में विटिलिगो को लेकर कई गलत धारणाएं प्रचलित हैं, जिनके कारण प्रभावित लोगों को सामाजिक भेदभाव और मानसिक दबाव का सामना करना पड़ता है। उन्होंने बताया कि विटिलिगो एक त्वचा विकार है, जिसमें त्वचा का रंग बनाने वाली कोशिकाएं प्रभावित हो जाती हैं। यह न तो संक्रामक रोग है और न ही किसी व्यक्ति को छूने से फैलता है।
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उन्होंने लोगों से अपील की कि सफेद दाग को लेकर फैली गलतफहमियों और डर को दूर करें तथा वैज्ञानिक तथ्यों को स्वीकार करें, ताकि प्रभावित व्यक्तियों को समाज में सम्मानजनक वातावरण मिल सके।
कार्यक्रम में वरिष्ठ त्वचा रोग विशेषज्ञ Dr. Y. S. Bisht ने बताया कि वर्तमान चिकित्सा पद्धतियों में विटिलिगो के उपचार के लिए कई प्रभावी विकल्प उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि कई मामलों में दवाओं, फोटोथेरेपी और अन्य उपचारों के साथ-साथ त्वचा प्रत्यारोपण (स्किन ग्राफ्टिंग) जैसी सर्जिकल तकनीकों से भी बेहतर परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं।
इस अवसर पर Dr. Samarjeet Roy और Dr. Ruchi Hemdani ने बताया कि समाज में सफेद दाग को लेकर यह भ्रांति फैली हुई है कि यह कुष्ठ रोग है या इसका कोई इलाज नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ये धारणाएं पूरी तरह गलत हैं और सही समय पर विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श लेकर इसका प्रभावी उपचार कराया जा सकता है।
कार्यक्रम के दौरान एक विशेष नुक्कड़ नाटक का भी मंचन किया गया, जिसमें विटिलिगो से प्रभावित लोगों द्वारा झेली जाने वाली मनोसामाजिक चुनौतियों, समाज के व्यवहार और आत्म-स्वीकृति की उनकी यात्रा को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया। इस नाटक के माध्यम से लोगों को संवेदनशील बनने और सफेद दाग से पीड़ित व्यक्तियों के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने का संदेश दिया गया।
Reported by: Arun Sharma












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