
ग्रामीण महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में सरकारी योजनाएं सकारात्मक बदलाव ला रही हैं। इसकी एक प्रेरणादायक मिसाल हरिद्वार जिले के बहादराबाद विकासखंड के लालढांग क्षेत्र स्थित चमारिया गांव की भारती रावत हैं। उन्होंने मुर्गी पालन को अपनी आजीविका का मजबूत माध्यम बनाया है। रिप (रूरल एंटरप्राइज एक्सेलेरेशन प्रोजेक्ट) परियोजना के तहत वित्तीय सहायता और सब्सिडी प्राप्त कर वर्ष 2025 में ब्रॉयलर पोल्ट्री फार्म शुरू करने वाली भारती आज प्रत्येक उत्पादन चक्र में करीब 50 से 55 हजार रुपये की आय अर्जित कर रही हैं।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। 35 वर्षीय भारती रावत, पत्नी कमल रावत, ने इन योजनाओं का लाभ उठाकर अपने घर के पास स्थित कृषि भूमि पर पोल्ट्री यूनिट स्थापित की। व्यवसाय शुरू करने के लिए उन्होंने दीनदयाल उपाध्याय योजना के अंतर्गत सहकारी बैंक से 1.60 लाख रुपये का ब्याजमुक्त ऋण प्राप्त किया, जिससे पोल्ट्री शेड का निर्माण कराया। इसके अलावा रिप परियोजना के तहत 75 हजार रुपये की सब्सिडी मिली, जिसने उद्यम स्थापित करने में महत्वपूर्ण मदद की।
2,200 चूजों की क्षमता, अब तक पूरे किए सात उत्पादन चक्र
भारती रावत की पोल्ट्री यूनिट में प्रत्येक उत्पादन चक्र के दौरान लगभग 2,200 ब्रॉयलर चूजों का पालन किया जाता है। वह अब तक सात उत्पादन चक्र सफलतापूर्वक पूरे कर चुकी हैं। प्रत्येक चक्र में लगभग 40 से 45 दिन का समय लगता है। इस व्यवसाय से होने वाली आय उनके परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में मदद कर रही है। अपनी मेहनत और लगन के बल पर भारती ने ग्रामीण क्षेत्र में महिला उद्यमी के रूप में पहचान बनाई है।
करनाल की हैचरी से मिल रहा तकनीकी सहयोग
पोल्ट्री व्यवसाय के संचालन में भारती के परिवार को हरियाणा के करनाल स्थित कल्याण हैचरी से भी सहयोग मिल रहा है। इस व्यवस्था के तहत एक दिन के वैक्सीनेटेड चूजों की आपूर्ति, पशु आहार, टीकाकरण, परिवहन, पशु चिकित्सकीय परामर्श और तैयार पक्षियों के विपणन में सहायता उपलब्ध कराई जाती है। इससे चूजों के पालन से लेकर तैयार पक्षियों की बिक्री तक जरूरी सहयोग मिल रहा है।
व्यवसाय की विपणन व्यवस्था को भी पारदर्शी बनाया गया है। डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से विक्रेताओं और ठेकेदारों की मांग के अनुसार पक्षियों की बिक्री की जाती है। निर्धारित दर और मात्रा के आधार पर पक्षियों का वजन किया जाता है। विभिन्न निर्धारित खर्चों की कटौती के बाद शेष भुगतान सीधे किसान के बैंक खाते में हस्तांतरित किया जाता है। इससे बाजार तक पहुंच आसान होने के साथ बिक्री प्रक्रिया में भी सुविधा मिल रही है।
सरकारी योजनाओं से मजबूत हुई आर्थिक स्थिति
भारती रावत के लिए मुर्गी पालन अब केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि परिवार को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने का माध्यम बन गया है। प्रत्येक उत्पादन चक्र में 50 से 55 हजार रुपये की आय से वह परिवार की जरूरतों को पूरा करने में योगदान दे रही हैं। सरकारी सहायता, तकनीकी मार्गदर्शन और बाजार से जुड़ाव ने उन्हें अपना व्यवसाय आगे बढ़ाने का अवसर दिया है।
उनकी सफलता की कहानी यह दर्शाती है कि वित्तीय सहायता, उचित मार्गदर्शन और मेहनत के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार की नई संभावनाएं विकसित की जा सकती हैं। भारती की यह पहल अन्य महिलाओं को भी अपना उद्यम शुरू करने और आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रही है।
मुख्यमंत्री और जिलाधिकारी का जताया आभार
भारती रावत ने स्वरोजगार के लिए सहायता और मार्गदर्शन उपलब्ध कराने पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी तथा जिलाधिकारी मयूर दीक्षित का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि रिप परियोजना के तहत मिली सब्सिडी और दीनदयाल उपाध्याय योजना के अंतर्गत प्राप्त ब्याजमुक्त ऋण से उन्हें मुर्गी पालन व्यवसाय शुरू करने और परिवार की आय बढ़ाने में काफी मदद मिली है। उन्होंने प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन का धन्यवाद करते हुए कहा कि इन योजनाओं के सहयोग से वह आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।
Reported By: Praveen Bhardwaj












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