लखनऊ में हुए भीषण अग्निकांड के बाद धर्मनगरी हरिद्वार में भी फायर सेफ्टी व्यवस्थाओं को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं। शहर में संचालित हो रहे अनेक कोचिंग सेंटर, होटल और व्यावसायिक भवनों के पास अग्निशमन विभाग की अनिवार्य एनओसी नहीं होने की बात सामने आने के बाद प्रशासन सतर्क हो गया है।
जानकारी के अनुसार हरिद्वार में हजारों की संख्या में छोटे-बड़े होटल और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठान संचालित हो रहे हैं। इनमें से बड़ी संख्या में ऐसी इमारतें हैं जिनके पास अग्निशमन विभाग की स्वीकृति या फायर एनओसी नहीं है। ऐसे में किसी दुर्घटना या आग लगने की स्थिति में जान-माल के बड़े नुकसान की आशंका बनी रहती है।
फायर सेफ्टी मानकों की अनदेखी को देखते हुए प्रशासन ने अब सख्त रुख अपनाया है। हरिद्वार के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) नवनीत सिंह ने संबंधित अधिकारियों को जिले की सभी व्यावसायिक इमारतों, होटलों, कोचिंग संस्थानों और सार्वजनिक भवनों का सेफ्टी ऑडिट कराने के निर्देश दिए हैं।
प्रशासन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सभी भवनों में आग से बचाव के पर्याप्त इंतजाम मौजूद हों और निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा हो। सेफ्टी ऑडिट के दौरान अग्निशमन उपकरणों, आपातकालीन निकास मार्गों और सुरक्षा व्यवस्थाओं की भी जांच की जाएगी।
अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन की इस पहल को संभावित हादसों को रोकने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
लखनऊ अग्निकांड के बाद हरिद्वार में शुरू हुई यह कवायद फायर सेफ्टी व्यवस्थाओं की वास्तविक स्थिति को सामने लाने के साथ-साथ लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभा सकती है।
नवनीत सिंह, एसएसपी, हरिद्वार
Reported BY: Ptaveen Bhardwaj












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