उत्तराखंड में सरकारी स्कूलों की स्थिति और शिक्षा व्यवस्था को लेकर CJP (CJP) ने प्रदेश सरकार से जवाब मांगा है। CJP के नॉर्थ जोन संयोजक श्रेष्ठ सिंह खेड़ा ने सरकारी विद्यालयों में स्कूलों के बंद होने, शिक्षकों की उपलब्धता और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े मुद्दे उठाते हुए सरकार से शिक्षा व्यवस्था पर स्पष्ट रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की है।
खेड़ा ने दावा किया कि प्रदेश में पिछले पांच वर्षों के दौरान 826 प्राथमिक सरकारी स्कूल बंद हुए हैं। यह आंकड़ा वर्ष 2020 से 2025 के बीच बंद हुए प्राथमिक विद्यालयों के सरकारी आंकड़ों से भी मेल खाता है। विधानसभा में सामने आई जानकारी के अनुसार, छात्रों की संख्या में कमी के कारण इन विद्यालयों को बंद किया गया।
सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी का मुद्दा
CJP के नॉर्थ जोन संयोजक श्रेष्ठ सिंह खेड़ा का कहना है कि प्रदेश के कई सरकारी विद्यालयों में जरूरी विषयों के शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं। उन्होंने गणित और भौतिक विज्ञान जैसे विषयों में शिक्षकों की कमी का दावा करते हुए सरकार से इस स्थिति पर जवाब मांगा है।
हालिया रिपोर्टों में भी उत्तराखंड के प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षक उपलब्धता की चुनौती सामने आई है। जुलाई 2026 की एक रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश के 2,655 प्राथमिक विद्यालय एकल शिक्षक के भरोसे संचालित हो रहे हैं, जहां 28,112 विद्यार्थी अध्ययनरत बताए गए हैं।
270 स्कूलों में पेयजल व्यवस्था नहीं होने का दावा
खेड़ा ने दावा किया कि प्रदेश के 270 स्कूलों में पीने के पानी की व्यवस्था नहीं है। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि पर्वतीय क्षेत्रों में पढ़ने वाले बच्चों को पर्याप्त शिक्षक और जरूरी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में क्या कदम उठाए जा रहे हैं।
CJP ने सरकारी और निजी विद्यालयों के बीच उपलब्ध सुविधाओं के अंतर को लेकर भी सरकार से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।
बंद स्कूलों के आंकड़ों पर सरकार से मांगी रिपोर्ट
CJP की ओर से शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत से बंद किए गए स्कूलों के आंकड़े और प्रदेश की मौजूदा शिक्षा व्यवस्था पर विस्तृत रिपोर्ट देने की मांग की गई है।
खेड़ा ने कहा कि सरकार को सरकारी विद्यालयों का ऑडिट कराकर शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए स्पष्ट रोडमैप सामने रखना चाहिए। उनका कहना है कि स्कूलों में विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक माहौल और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए।
10 दिन में जवाब नहीं मिला तो आंदोलन की चेतावनी
श्रेष्ठ सिंह खेड़ा के अनुसार, यदि सरकार की ओर से 10 दिन के भीतर स्पष्ट जवाब नहीं दिया जाता है तो 2 अक्टूबर के बाद देहरादून में बड़ा आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आंदोलन के दौरान सरकारी स्कूलों की स्थिति, शिक्षकों की उपलब्धता और विद्यार्थियों को मिलने वाली बुनियादी सुविधाओं के मुद्दे उठाए जाएंगे।
खेड़ा ने यह भी कहा कि आने वाले समय में शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत के इस्तीफे की मांग भी उठाई जा सकती है।
826 स्कूल बंद होने का मुद्दा क्यों अहम?
उत्तराखंड में प्राथमिक विद्यालयों की घटती छात्र संख्या और स्कूलों के बंद होने का मुद्दा लगातार चर्चा में है। विधानसभा में उपलब्ध जानकारी के अनुसार 2020 से 2025 के बीच 826 प्राथमिक विद्यालय बंद हुए। टिहरी में 262, पौड़ी में 120 और पिथौरागढ़ में 104 स्कूल बंद होने की जानकारी सामने आई थी।
वहीं, अगस्त 2026 की रिपोर्टों में करीब 5,000 प्राथमिक और जूनियर हाईस्कूलों में 10 या उससे कम विद्यार्थी होने की बात सामने आई है, जिससे सरकारी स्कूलों में घटती छात्र संख्या का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आया है।
शिक्षा व्यवस्था पर सरकार से जवाब की मांग
CJP ने सरकार से स्कूल बंद होने के कारणों, शिक्षकों की उपलब्धता, पेयजल समेत बुनियादी सुविधाओं और सरकारी विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। अब देखना होगा कि सरकार की ओर से इन आरोपों और मांगों पर क्या जवाब सामने आता है।
श्रेष्ठ सिंह खेड़ा, नार्थ जॉन कॉरिडिनेटर, सीजेपी
Reported By: Arun Sharma












Discussion about this post