उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में अशासकीय वेतन अनुदान संघर्ष समिति उत्तराखंड ने प्रेसवार्ता की गयी। यह प्रेसवार्ता देहरादून के प्रेसक्लब में की गई। जिसमे कहा गया कि उत्तराखंड एक पर्वतीय भौगोलिक परिस्थिति वाला प्रदेश है। जिसमे सबसे बड़ी समस्या आज शिक्षा के अभाव में पर्वतीय क्षेत्रों से मैदानी क्षेत्रों की ओर पलायन की है। वहीं यह भी बताया गया कि उत्तराखंड में जितने भी राजकीय इंटर कालेज संचालित है। उनमें से 90 प्रतिशत जनता द्वारा दान व चंदे से खोले गए है। उन्ही स्कूलों के द्वारा ही उत्तराखंड शिक्षा क्षेत्र में अग्रणी बना है।
लेकिन जनवरी 2017 में तत्कालीन सरकार ने शिक्षा विरोधी शासनादेश लागू किया। जो कि उत्तराखंड की भौगोलिक व आर्थिक परिस्थितियों के लिए न्याय संगत नही है। क्योंकि जनता के द्वारा दिये गए दान से खोले गए विद्यालयों की भूमि, भवन की तो व्यवस्था हो जाती है। लेकिन विद्यालयों में शिक्षण हेतु नियुक्त अधयापकों का वेतन देना कठिन हो जाता है। समिति ने मांग की है कि ऐसे स्कूलों को सरकार द्वारा अनुदान देना चाहिए। जिससे ऐसे स्कूल बंद ना हो।
महादेव मैठाणी, प्रांतीय महामंत्री अशासकीय वेतन अनुदान संघर्ष समिति उत्तराखंड
बिजेंद्र सिंह गुसांई, प्रांतीय अध्यक्ष अशासकीय वेतन अनुदान संघर्ष समिति उत्तराखंड
Reported By: Shiv Narayan












Discussion about this post