
प्रदेश में अतिथि शिक्षकों के मानदेय में वृद्धि और अन्य सुविधाएं दिए जाने की मांग को लेकर जन संघर्ष मोर्चा ने बुधवार को विकासनगर तहसील का घेराव कर प्रदर्शन किया। मोर्चा अध्यक्ष एवं जीएमवीएन के पूर्व उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह नेगी के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन उप जिलाधिकारी की अनुपस्थिति में तहसील के नाजिर बिजल्वाण को सौंपा।
इस दौरान रघुनाथ सिंह नेगी ने कहा कि प्रदेश के राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में करीब 10 वर्षों से अधिक समय से सेवाएं दे रहे लगभग पांच हजार अतिथि शिक्षकों का भविष्य अधर में है। उन्होंने शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत पर अतिथि शिक्षकों की समस्याओं के समाधान को लेकर गंभीरता नहीं दिखाने का आरोप लगाया।
नेगी ने कहा कि अतिथि शिक्षकों को वर्तमान में मात्र 25 हजार रुपये मासिक मानदेय दिया जा रहा है, जो मौजूदा महंगाई और उनकी जिम्मेदारियों को देखते हुए पर्याप्त नहीं है। इतना ही नहीं, उन्हें ग्रीष्मकालीन और शीतकालीन अवकाश के दौरान भी मानदेय नहीं दिया जाता। उन्होंने कहा कि इन शिक्षकों को ईपीएफ और ईएसआई जैसी मूलभूत सामाजिक सुरक्षा सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि विभागीय मंत्री की ओर से अतिथि शिक्षकों का मानदेय बढ़ाने के निर्देश दिए जाने के बावजूद अब तक इस पर अमल नहीं हो पाया है। नेगी ने कहा कि कई अतिथि शिक्षक अपने घरों से 200 से 400 किलोमीटर या इससे भी अधिक दूरी पर स्थित दुर्गम क्षेत्रों के विद्यालयों में सेवाएं दे रहे हैं। ऐसे में 25 हजार रुपये के मानदेय का बड़ा हिस्सा मकान किराये और खानपान पर खर्च हो जाता है। इससे उनके सामने परिवार का भरण-पोषण करना भी चुनौतीपूर्ण हो रहा है।
मोर्चा अध्यक्ष ने मांग की कि अतिथि शिक्षकों का मासिक मानदेय बढ़ाकर कम से कम 40 हजार रुपये किया जाए। इसके साथ ही उन्हें ग्रीष्मकालीन एवं शीतकालीन अवकाश का मानदेय देने तथा ईपीएफ और ईएसआई जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएं।
प्रदर्शन के माध्यम से मोर्चा कार्यकर्ताओं ने सरकार से अतिथि शिक्षकों की समस्याओं का शीघ्र समाधान करने और उनकी सेवा शर्तों में सुधार करने की मांग उठाई।
रघुनाथ सिंह नेगी, अध्यक्ष
Reported By: Arun Sharma













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