परमार्थ निकेतन, ऋषिकेश में चल रही श्रीमद्भागवत कथा का दिव्य विश्राम हुआ। कथाव्यास श्री कनकेश्वरी देवी जी के श्रीमुख से प्रवाहित हो रही यह ज्ञानगंगा साधकों के लिए गहन आध्यात्मिक अनुभूति का अवसर बनी। इस पावन समापन अवसर पर परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी और साध्वी भगवती सरस्वती जी का सान्निध्य व प्रेरक संदेश प्राप्त हुआ।
विश्व खाद्य दिवस पर स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने “बेहतर भोजन और बेहतर भविष्य” का संदेश देते हुए कहा कि भोजन केवल पेट भरने का साधन नहीं, बल्कि करुणा और समानता का प्रतीक है। उन्होंने सभी से भोजन का सम्मान करने, अपव्यय रोकने और जरूरतमंदों तक पौष्टिक भोजन पहुँचाने का आग्रह किया।
साध्वी भगवती सरस्वती जी ने कहा कि भोजन हमारी संस्कृति और धर्म का प्रतीक है। अन्न को अन्नपूर्णा माता के समान मानकर कृतज्ञता और संयम के साथ ग्रहण करना चाहिए।
कथाव्यास श्री कनकेश्वरी देवी जी ने कहा कि गंगा तट पर आयोजित भागवत कथा जीवन को करुणा, सेवा और मानवता के उच्च मूल्यों की ओर प्रेरित करती है। कथा का विश्राम एक नई आध्यात्मिक शुरुआत का प्रतीक है।
Reported By: Arun Sharma












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