उत्तराखंड के सीमांत क्षेत्रों के सर्वांगीण विकास को लेकर राज्य सरकार ने अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। ग्रामीण विकास विभाग की अपर सचिव और आयुक्त अनुराधा पाल ने बताया कि केंद्र सरकार की ‘वाइब्रेंट विलेज’ योजना के तहत वर्तमान में चयनित सीमांत गांवों के संतृप्तीकरण (Saturation) के बाद, अब अन्य सीमांत गांवों को भी इस योजना में शामिल करने की तैयारी है।
अनुराधा पाल ने प्रेस को संबोधित करते हुए कहा कि राज्य सरकार की ओर से भारत सरकार को एक औपचारिक प्रस्ताव और ज्ञापन भेजा गया है। इस प्रस्ताव में मांग की गई है कि वर्तमान चयनित गांवों का विकास कार्य पूरा होने के बाद, सीमा से लगे अन्य दूरस्थ गांवों को भी इस सूची में जोड़ा जाए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार वर्तमान में MBADP (मल्टी-सेक्टरल बॉर्डर एरिया डेवलपमेंट प्रोग्राम) के माध्यम से भी उन ब्लॉक और क्षेत्रों में विकास कार्य कर रही है, जो पहले BADP के अंतर्गत नहीं आते थे। पाल ने उम्मीद जताई कि केंद्र सरकार इस पर सकारात्मक विचार करेगी, जिससे भविष्य में उत्तराखंड के अधिक से अधिक सीमांत गांवों को बुनियादी सुविधाओं और स्वरोजगार के अवसरों से जोड़ा जा सके।
अनुराधा पाल अपर सचिव/आयुक्त, ग्रामीण विकास
Reported By: Praveen Bhardwaj












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