अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ऋषिकेश ने एक ऐतिहासिक पहल करते हुए एम्स अस्पताल में जन्मे नवजात शिशुओं के लिए जन्म प्रमाण पत्र जारी करने की सुविधा शुरू कर दी है। शुक्रवार को संस्थान द्वारा आधिकारिक रूप से पहला जन्म प्रमाण पत्र जारी किया गया, जिसे अस्पताल से छुट्टी मिलने से पहले ही परिजनों को सौंपा गया। यह पहल संस्थान की एकीकृत रोगी देखभाल सेवाओं के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
संस्थान में पहला जन्म प्रमाण पत्र श्रीमती सुलोचना को संस्थान की निदेशक एवं सीईओ प्रोफेसर (डॉ.) मीनू सिंह तथा स्त्री एवं प्रसूति रोग विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) जया चतुर्वेदी द्वारा प्रदान किया गया। इस अवसर पर डीन रिसर्च प्रो. (डॉ.) शैलेन्द्र एस. हांडू, डीन अकादमिक प्रो. (डॉ.) सौरव वर्ष्णेय तथा मेडिकल सुपरिटेंडेंट प्रो. (डॉ.) सत्याश्री बालिजा सहित संस्थान के कई अधिकारी एवं हितधारक उपस्थित रहे।
इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए प्रो. मीनू सिंह ने कहा कि यह पहल समग्र रोगी देखभाल के प्रति संस्थान की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि अब एम्स में जन्म लेने वाले प्रत्येक बच्चे को प्रारंभिक स्तर पर ही उसकी कानूनी पहचान उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं और आवश्यक नागरिक सुविधाओं के बीच की दूरी कम होगी।
बच्चे के पिता विनोद सिंह ने भी इस सरल एवं सुगम प्रक्रिया के लिए संस्थान की सराहना की।
संस्थान की ओर से डॉ. प्रदीप अग्रवाल को प्रथम जन्म एवं मृत्यु रजिस्ट्रार नियुक्त किया गया है। इसे नागरिक पंजीकरण सेवाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण संस्थागत कदम माना जा रहा है।
एम्स ऋषिकेश ने सभी अभिभावकों से समय पर जन्म पंजीकरण सुनिश्चित करने की अपील की है। संस्थान के अनुसार जन्म पंजीकरण प्रत्येक बच्चे का मूल कानूनी अधिकार है, जो भविष्य में शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं, पहचान दस्तावेजों और विभिन्न सरकारी योजनाओं तक पहुंच का महत्वपूर्ण आधार बनता है।
संस्थान का मानना है कि इन सेवाओं के एकीकरण से न केवल परिवारों को आवश्यक नागरिक दस्तावेज आसानी से उपलब्ध होंगे, बल्कि नागरिक पंजीकरण एवं जीवन सांख्यिकी (CRVS) प्रणाली को भी मजबूती मिलेगी और सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रशासन के लिए सटीक आंकड़ों का संकलन संभव हो सकेगा।
Reported By: Arun Sharma












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