हल्द्वानी। प्रदेश में मानसून की दस्तक से पहले वन विभाग ने वन्यजीवों और जंगलों की सुरक्षा को लेकर व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं। मानसून के दौरान अवैध शिकार और वन्यजीव तस्करी की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए विभाग ने विशेष अभियान ‘ऑपरेशन मानसून’ शुरू किया है। तराई क्षेत्र के संवेदनशील जंगलों में निगरानी बढ़ा दी गई है और सीमावर्ती इलाकों में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है।
हल्द्वानी वन प्रभाग के प्रभागीय वनाधिकारी (डीएफओ) कुंदन कुमार ने बताया कि मानसून के दौरान जंगलों में शिकारियों की गतिविधियां बढ़ने की आशंका रहती है। भारी बारिश, भूस्खलन, नदियों में उफान और जलभराव के कारण कई वन क्षेत्र मुख्य मार्गों से कट जाते हैं, जिससे नियमित गश्त चुनौतीपूर्ण हो जाती है। ऐसे हालात का फायदा उठाकर शिकारी और तस्कर जंगलों में घुसपैठ करने की कोशिश करते हैं।
उन्होंने बताया कि बरसात के मौसम में घनी झाड़ियां और बढ़ी हुई वनस्पति भी शिकारियों को छिपने का अवसर प्रदान करती हैं। इसी को देखते हुए विभाग ने निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत किया है।
वन विभाग ने दुर्गम और जलभराव वाले क्षेत्रों में निगरानी के लिए आधुनिक तकनीक का सहारा लिया है। जिन इलाकों में वनकर्मियों की पहुंच मुश्किल है, वहां ड्रोन और थर्मल कैमरों के माध्यम से 24 घंटे निगरानी की जाएगी। इसके साथ ही जंगलों के भीतर पैदल गश्त को भी बढ़ा दिया गया है।
तस्करी और अवैध शिकार को रोकने के लिए उत्तर प्रदेश और नेपाल से लगी अंतरराज्यीय एवं अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर चौकसी दोगुनी कर दी गई है। सीमावर्ती क्षेत्रों में विशेष गश्ती दल तैनात किए गए हैं। विभाग ने गश्ती टीमों को ड्रोन, कैमरा ट्रैप, संचार उपकरणों और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में उपयोग के लिए नाव जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई हैं।
डीएफओ कुंदन कुमार ने कहा कि जंगलों में किसी भी प्रकार की संदिग्ध गतिविधि को गंभीरता से लिया जाएगा और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने लोगों से भी वन्यजीवों और जंगलों की सुरक्षा में सहयोग करने तथा किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तत्काल विभाग को देने की अपील की।
वन विभाग का मानना है कि ‘ऑपरेशन मानसून’ के जरिए मानसून अवधि में वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और तस्करी व शिकार की घटनाओं को रोकने में बड़ी सफलता मिलेगी।
कुंदन कुमार डीएफओ
Reported By: Praveen Bhardwaj












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