विकासनगर में जन संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष एवं जीएमवीएन के पूर्व उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह नेगी ने समग्र शिक्षा अभियान के तहत कार्यरत बीआरपी (ब्लॉक रिसोर्स पर्सन) और सीआरपी (क्लस्टर रिसोर्स पर्सन) कर्मचारियों के मुद्दे पर सरकार और आउटसोर्सिंग एजेंसी पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि मोर्चा के आंदोलन के बाद कर्मचारियों के हित में महत्वपूर्ण फैसला लिया गया है।
पत्रकारों से वार्ता करते हुए नेगी ने बताया कि प्रदेशभर में समग्र शिक्षा अभियान के तहत कार्यरत बीआरपी-सीआरपी कार्मिकों का निजी आउटसोर्सिंग एजेंसियों द्वारा शोषण किया जा रहा था। इस मामले को लेकर जन संघर्ष मोर्चा ने लगातार आंदोलन किया, जिसके बाद वित्त नियंत्रक, समग्र शिक्षा उत्तराखंड ने 22 जुलाई 2026 को आउटसोर्सिंग एजेंसी अलंकित लिमिटेड को निर्देश जारी कर सभी कर्मचारियों को नियमित रूप से वेतन पर्ची (पे-स्लिप) उपलब्ध कराने के आदेश दिए। उन्होंने इसे मोर्चा की बड़ी जीत बताया।
रघुनाथ सिंह नेगी ने आरोप लगाया कि इस पूरे मामले में शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत पूरी तरह बेखबर रहे। उन्होंने कहा कि मंत्री को यह तक जानकारी नहीं थी कि प्रदेशभर में कार्यरत करीब 600 से 700 बीआरपी-सीआरपी कर्मचारियों का निर्धारित वेतन कितना है, उन्हें वास्तविक रूप से कितना भुगतान किया जा रहा है और विभिन्न मदों में कितनी कटौती की जा रही है।
नेगी ने कहा कि आउटसोर्सिंग एजेंसी कर्मचारियों के वेतन से कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) और कमीशन के नाम पर कटौती कर रही थी, लेकिन अधिकांश कर्मचारियों को यह जानकारी ही नहीं थी कि उनके ईपीएफ की राशि वास्तव में जमा भी हो रही है या नहीं। उनका कहना था कि वेतन पर्ची नहीं मिलने के कारण कर्मचारी अपने वेतन और कटौतियों का पूरा विवरण नहीं देख पा रहे थे।
जन संघर्ष मोर्चा अध्यक्ष ने कर्मचारियों से अपील की कि यदि 22 जुलाई के आदेश के बाद भी किसी कर्मचारी को वेतन पर्ची उपलब्ध नहीं कराई जा रही है, तो वे इसकी जानकारी मोर्चा को दें, ताकि संबंधित एजेंसी और अधिकारियों के खिलाफ आगे की कार्रवाई कराई जा सके।
उन्होंने कहा कि कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए जन संघर्ष मोर्चा भविष्य में भी संघर्ष जारी रखेगा।
Reported By: Arun Sharma












Discussion about this post