स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय मातृ पृथ्वी दिवस के अवसर पर एक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण और पृथ्वी के प्रति जिम्मेदारी को लेकर जागरूकता बढ़ाना रहा।
रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेल की ओर से बी.सी. रॉय ऑडिटोरियम में आयोजित इस कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. राजेंद्र डोभाल ने कहा कि वर्तमान समय में पर्यावरण संरक्षण केवल विकल्प नहीं बल्कि हमारी अनिवार्य जिम्मेदारी है। उन्होंने छात्रों और शोधकर्ताओं से वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाते हुए प्रकृति संरक्षण में सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता, भू वैज्ञानिक एवं वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी के पूर्व निदेशक डॉ. बलदेव राज अरोड़ा ने कहा कि मातृ पृथ्वी मानव जीवन के लिए एक “स्वास्थ्य प्रदाता” की तरह कार्य करती है। उन्होंने पृथ्वी की तुलना मानव शरीर से करते हुए बताया कि जैसे शरीर तापमान के प्रति संवेदनशील होता है, वैसे ही पृथ्वी भी तापमान में बदलाव के अनुसार प्रतिक्रिया देती है और प्राकृतिक प्रक्रियाओं के जरिए संतुलन बनाए रखती है। इन प्रक्रियाओं में बाधा आने पर प्राकृतिक आपदाएं उत्पन्न होती हैं।
इससे पूर्व डायरेक्टर रिसर्च डॉ. बिंदू डे ने इस दिवस के महत्व पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम के दौरान उपस्थित शिक्षकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने पृथ्वी के संरक्षण का संकल्प लिया। अंत में डॉ. पुरांधी रूपमणि ने सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया।












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