भारत की विविधता का अनमोल प्रतीक है करम पूजा, जो आदिवासी समाज का प्रमुख उत्सव है। यह केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि प्रकृति से जुड़ाव, भाई-बहन के स्नेह और श्रम व कृषि के महत्व का उत्सव है। इस दिन करम देवता की पूजा होती है, जिन्हें हरियाली, समृद्धि और भाईचारे का प्रतीक माना जाता है।
पूजा का मुख्य आकर्षण करम वृक्ष की डाल का प्रतिष्ठापन है। युवतियाँ उपवास रखकर गीत-नृत्य करती हैं, करम कथा का श्रवण होता है और सामूहिक उत्सव का आयोजन किया जाता है। यह पर्व हमें सिखाता है कि प्रकृति केवल उपयोग की वस्तु नहीं, बल्कि संरक्षण और सहयोग की धरोहर है।
आज जब पूरी दुनिया पर्यावरण संकट और जलवायु परिवर्तन की चुनौती से जूझ रही है, करम पूजा का संदेश और भी प्रासंगिक हो उठता है। यह हमें प्रेरित करता है कि जल, जंगल और जमीन की रक्षा कर सतत जीवन शैली अपनाएं।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी के शब्दों में, यह पर्व हमें तीन प्रमुख संदेश देता है—प्रकृति का सम्मान करें, परिवार और भाईचारे को संजोएं तथा श्रम और कृषि का आदर करें। करम पूजा परंपराओं की जीवंतता और जड़ों से जुड़े रहने की सीख भी देती है।
यह पावन पर्व हमें याद दिलाता है कि भारत की शक्ति उसकी विविधताओं में है। करम पूजा केवल आदिवासी समाज का पर्व नहीं, बल्कि पूरे भारत की धरोहर है। यह हमें एकता, समृद्धि और सतत प्रगति की ओर ले जाने वाला उत्सव है।
Reported By: Arun Sharma












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