
टिहरी गढ़वाल की जिलाधिकारी एवं पुनर्वास निदेशक नितिका खण्डेलवाल के निर्देशों के बाद टिहरी बांध प्रभावित और शहरी विस्थापितों के भूमिधरी मामलों में अब महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है। उप महाप्रबंधक (पुनर्वास), पुनर्वास निदेशालय नई टिहरी ने जानकारी दी कि अब भूमिधरी से संबंधित सभी प्रकरण तहसील टिहरी से निपटाए जाएंगे।
उन्होंने बताया कि शहरी पात्र विस्थापितों को आवंटित भूखण्डों पर भूमिधरी अधिकार प्रदान करने हेतु प्राप्त आवेदनों की जांच के बाद सूची तैयार की जाती है और इसके आधार पर तहसील कार्यालय नई टिहरी द्वारा दाखिला-खारिज की प्रक्रिया पूरी की जाती है।
नई व्यवस्था के तहत भूमिधरी अधिकार दिए जाने की प्रक्रिया इस प्रकार होगी:
1. आवेदन प्रक्रिया:
मूल भूखण्ड आवंटी, उत्तरजीवी या केता आवेदक तहसील टिहरी में आवंटन पत्र, कब्जा प्रमाण पत्र, धनराशि जमा रसीद, आधार कार्ड, आवश्यक शपथ पत्र तथा मृत्यु या क्रय संबंधी दस्तावेजों के साथ आवेदन प्रस्तुत करेंगे।
2. दस्तावेजों का सत्यापन:
तहसील टिहरी प्राप्त आवेदनों और साक्ष्यों को जांच के लिए पुनर्वास निदेशालय नई टिहरी को भेजेगा।
3. सात दिन में जांच:
पुनर्वास निदेशालय 7 दिनों के भीतर आवेदन पत्रों की जांच कर उन्हें पुनः तहसील टिहरी को भेज देगा।
4. दाखिला-खारिज की कार्यवाही:
सत्यापन के बाद तहसील टिहरी संबंधित काश्तकारों के नाम दाखिला-खारिज की प्रक्रिया तेज गति से पूरी करेगी।
5. एक माह में निपटारा:
आवेदक द्वारा आवेदन प्रस्तुत करने की तिथि से एक माह के भीतर दाखिला-खारिज की कार्रवाई पूरी कर दी जाएगी।
इस नई व्यवस्था से टिहरी बांध प्रभावितों के भूमिधरी प्रकरणों में तेजी आएगी और पात्र विस्थापितों को समयबद्ध तरीके से भूमि अधिकार प्राप्त हो सकेंगे।
Reported By: Arun Sharma













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