उत्तराखंड में मदरसा बोर्ड समाप्त किए जाने के बाद अब मदरसों को अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के तहत पंजीकरण और मान्यता की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। प्रदेश में अभी भी कई ऐसे मदरसे हैं, जिन्होंने मान्यता के लिए जरूरी दस्तावेजी प्रक्रिया पूरी नहीं की है। सरकार ने ऐसे मदरसों को लेकर अब सख्त रुख अपनाने के संकेत दिए हैं।
उत्तराखंड अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के विशेष सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते ने बताया कि प्रदेश में कुल 452 पंजीकृत मदरसे हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षण अधिनियम पारित हो चुका है और इसके तहत 30 जून 2026 को मदरसा बोर्ड समाप्त हो गया है।
इसे भी पढ़ें
उन्होंने बताया कि मदरसा बोर्ड के समाप्त होने के बाद प्रदेश में संचालित सभी मदरसों को दोबारा शिक्षा विभाग से आवश्यक अनुमति प्राप्त करनी थी। इसके साथ ही अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थान के रूप में मान्यता प्राप्त करने के लिए अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के समक्ष आवेदन करना भी जरूरी किया गया है।
विशेष सचिव के अनुसार, जिन मदरसों ने मान्यता के लिए आवेदन किया है, उनके मामलों में निर्धारित प्रक्रिया के तहत कार्रवाई चल रही है। वहीं, जिन मदरसों ने अब तक मान्यता के लिए आवेदन नहीं किया है, उन्हें नोटिस जारी किए जा रहे हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि नोटिस के बावजूद निर्धारित प्रक्रिया पूरी नहीं करने वाले मदरसों के खिलाफ नियमों के तहत बंद करने (क्लोजर) की कार्रवाई की जाएगी। सरकार का उद्देश्य प्रदेश में संचालित मदरसों की व्यवस्था को निर्धारित नियमों और मानकों के अनुरूप करना है।
आवेदन नहीं करने वाले मदरसों पर बढ़ेगी सख्ती
सरकार की इस कार्रवाई के बाद अब उन मदरसों पर विशेष निगरानी रहेगी, जिन्होंने मदरसा बोर्ड समाप्त होने के बाद नई व्यवस्था के तहत पंजीकरण और मान्यता की प्रक्रिया शुरू नहीं की है। विभाग की ओर से ऐसे संस्थानों को नियमानुसार नोटिस देकर आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने का अवसर दिया जा रहा है।
विभाग का कहना है कि निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं करने वाले संस्थानों को संचालित करने की अनुमति नहीं दी जाएगी और नियमों के अनुसार उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।












Discussion about this post