नीस, फ्रांस (15 जून 2026): उपभोक्ता प्रौद्योगिकी क्षेत्र की अग्रणी कंपनी Nothing ने भारत के नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र (Innovation Ecosystem) को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के उद्देश्य से एक बड़ा रणनीतिक कदम उठाया है। फ्रांस के नीस में आयोजित ‘भारत इनोवेट्स 2026’ कार्यक्रम के दौरान, Nothing ने IIT रुड़की और भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) के फाउंडेशन फॉर साइंस, इनोवेशन एंड डेवलपमेंट (FSID) के साथ दो प्रमुख समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए।
इस कार्यक्रम में भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल, प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रो. अजय कुमार सूद और IIT रुड़की के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के अध्यक्ष श्री हरीश साल्वे की गरिमामयी उपस्थिति रही।
क्या हैं इस साझेदारी के मुख्य उद्देश्य?
यह रणनीतिक सहयोग उद्योग और शिक्षा जगत (Industry-Academia) के बीच की खाई को पाटने का प्रयास करेगा। इसके मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
IIT रुड़की के साथ सहयोग: Nothing छात्रों को मेंटरशिप, विशेषज्ञ व्याख्यान और केस स्टडीज के माध्यम से डीप-टेक नवाचार, उत्पाद अभियांत्रिकी (Product Engineering) और इलेक्ट्रॉनिक डिज़ाइन में प्रशिक्षित करेगा। दोनों संस्थान मिलकर एक ‘इंडस्ट्रियल डिज़ाइन चैलेंज’ आयोजित करने की संभावनाओं पर भी काम करेंगे।
IISc-FSID के साथ सहयोग: यह साझेदारी स्टार्टअप्स पर केंद्रित है। Nothing, IISc के इनक्यूबेटेड स्टार्टअप्स को मेंटरशिप, नेटवर्किंग के अवसर और व्यावसायिक सहयोग प्रदान करेगा, जिससे उभरते उद्यमियों को वैश्विक स्तर पर अपनी तकनीक को विकसित करने में मदद मिलेगी।
नवाचार और विकास पर नेतृत्व की राय
Nothing के सह-संस्थापक और भारत अध्यक्ष, अकिस इवैंजेलिडिस ने कहा, “भारत में नवाचार की अगली लहर अकादमिक जगत, उद्यमियों और उद्योग के सहयोग से आएगी। हम अपने वैश्विक अनुभव के माध्यम से छात्रों और स्टार्टअप्स को उनके विचारों को वास्तविकता में बदलने के अवसर प्रदान करने के लिए उत्साहित हैं।”
वहीं, IIT रुड़की के निदेशक प्रो. के. के. पंत ने इस साझेदारी को भारत को ‘डीप-टेक नवाचार का वैश्विक केंद्र’ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।
भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका
जी-7 शिखर सम्मेलन से पूर्व आयोजित ‘भारत इनोवेट्स 2026’ मंच ने साबित कर दिया है कि भारत अब केवल प्रौद्योगिकी का उपभोक्ता नहीं, बल्कि वैश्विक निर्माता बनने की राह पर है। Nothing जैसी कंपनियों का अकादमिक संस्थानों से जुड़ना न केवल छात्रों के लिए व्यावहारिक अनुभव के द्वार खोलेगा, बल्कि यह भारत के ‘मेक इन इंडिया’ और ‘डिजिटल इंडिया’ विजन को भी एक नई गति प्रदान करेगा।
Reported By: Arun Sharma









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