भारत और इटली के संबंध अब एक निर्णायक और व्यापक दौर में प्रवेश कर चुके हैं। हाल के वर्षों में दोनों देशों के रिश्तों में तेज़ी से विस्तार हुआ है और यह साझेदारी अब केवल मित्रता तक सीमित न रहकर स्वतंत्रता, लोकतंत्र, नवाचार और साझा वैश्विक दृष्टिकोण पर आधारित विशेष रणनीतिक साझेदारी के रूप में उभर रही है।
दोनों देशों के बीच बढ़ता सहयोग ऐसे समय में और महत्वपूर्ण हो गया है, जब वैश्विक व्यवस्था बड़े बदलावों के दौर से गुजर रही है। भारत और इटली आर्थिक विकास, तकनीकी नवाचार, ऊर्जा परिवर्तन और रणनीतिक आत्मनिर्भरता जैसे क्षेत्रों में मिलकर काम कर रहे हैं। इटली की डिजाइन, उन्नत विनिर्माण और सुपरकंप्यूटर तकनीक को भारत की तेज आर्थिक वृद्धि, इंजीनियरिंग क्षमता और स्टार्टअप इकोसिस्टम के साथ जोड़कर नई संभावनाओं का निर्माण किया जा रहा है।
यूरोपीय संघ और भारत के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को भी दोनों देशों के आर्थिक संबंधों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। लक्ष्य है कि वर्ष 2029 तक भारत-इटली व्यापार को 20 अरब यूरो से आगे पहुंचाया जाए। रक्षा, एयरोस्पेस, ऑटोमोबाइल, स्वच्छ ऊर्जा, दवा, वस्त्र, कृषि और पर्यटन जैसे क्षेत्रों में निवेश और सहयोग बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
तकनीकी क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), क्वांटम कंप्यूटिंग, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में भी दोनों देश साथ मिलकर काम कर रहे हैं। भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और इटली की मानव-केंद्रित तकनीकी सोच को मिलाकर समावेशी और सुरक्षित डिजिटल भविष्य तैयार करने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।
ऊर्जा क्षेत्र में भी दोनों देशों की साझेदारी मजबूत हो रही है। ग्रीन हाइड्रोजन, नवीकरणीय ऊर्जा, स्मार्ट ग्रिड और सतत विकास के क्षेत्रों में भारत और इटली सहयोग बढ़ा रहे हैं। भारत की अगुवाई वाली अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) और ग्लोबल बायोफ्यूल्स एलायंस जैसी पहलों में भी दोनों देशों का समन्वय महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारा (IMEC) को भी इस साझेदारी का अहम हिस्सा माना जा रहा है। यह परियोजना भारत, मध्य पूर्व और यूरोप को आधुनिक परिवहन, डिजिटल नेटवर्क और ऊर्जा प्रणालियों के माध्यम से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
भारत और इटली ने स्पष्ट किया है कि उनकी साझेदारी केवल आर्थिक या रणनीतिक नहीं, बल्कि साझा सांस्कृतिक मूल्यों और मानव-केंद्रित विकास की सोच पर आधारित है। दोनों देश भविष्य में वैश्विक स्थिरता, लोकतांत्रिक मूल्यों और समावेशी विकास के लिए मिलकर काम करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
Reported By: Praveen Bhardwaj














Discussion about this post