धारी देवी मंदिर परिसर को नेशनल हाईवे से जोड़ने वाले संपर्क मार्ग पर प्रशासन ने बीती रात अचानक कार्रवाई करते हुए कई दुकानों को जेसीबी से तोड़ दिया। प्रशासन की यह कार्रवाई अतिक्रमण हटाओ अभियान के तहत की गई बताई जा रही है।
लेकिन बड़ा सवाल यही है कि कार्रवाई रात में ही क्यों की गई? क्या इसे दिन में भी अंजाम नहीं दिया जा सकता था?
जैसे ही बुलडोज़र चलने की खबर स्थानीय दुकानदारों तक पहुँची, लोग दौड़े-दौड़े मौके पर पहुँचे और अपनी दुकानों को बचाने की कोशिश की। मगर प्रशासन ने किसी की एक न सुनी और तत्काल दुकानें हटवा दीं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि वे कई वर्षों से इन छोटी दुकानों से अपने परिवार का गुज़ारा कर रहे हैं, लेकिन प्रशासन ने न तो पहले कोई नोटिस दिया और न ही वैकल्पिक व्यवस्था। यही कारण है कि रातों-रात हुई इस कार्रवाई को लेकर लोगों में गहरा आक्रोश है।
इस घटना में लगभग चार से पाँच दुकानें तोड़ी गई हैं।
जब शंखनाद इंडिया ने ग्राम प्रधान धारी से बातचीत की, तो उन्होंने प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए। उनका कहना था कि –
बिना नोटिस दिए कार्रवाई करना उचित नहीं है।
रात्रि के समय बुलडोज़र चलाना सवालों के घेरे में है।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि भविष्य में प्रशासन का यही रवैया जारी रहा, तो ग्रामवासी आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।
वहीं इस पूरे मामले पर तहसीलदार श्रीनगर, दीपक भंडारी ने कहा कि –
> “लगातार स्थानीय लोगों द्वारा मार्ग पर दुकानों की संख्या बढ़ाई जा रही थी और अतिक्रमण हो रहा था। प्रशासन द्वारा पूर्व में कई बार दुकानदारों को अतिक्रमण हटाने की सूचना दी जा चुकी थी, लेकिन इसके बावजूद वे बाज नहीं आ रहे थे। इसलिए अतिक्रमण हटाने की यह कार्रवाई की गई है।”
अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रशासन इस सवाल का जवाब कब और कैसे देता है कि आखिर कार्रवाई दिन में न होकर देर रात क्यों की गई?
Reported By: Arun Sharma












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