
खांड्यूंसैंण में गुलदार के हमले में पांच वर्षीय बच्ची की मौत के बाद शुरू हुआ विरोध अब वन विभाग और स्थानीय जनता के बीच टकराव का रूप लेता जा रहा है। प्रदर्शन के दौरान गढ़वाल वन प्रभाग के डीएफओ महत्तिम यादव के साथ मारपीट और एसडीओ व तहसीलदार को बंधक बनाए जाने के मामले में वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने गुरुवार को काली पट्टी बांधकर विरोध जताया। कर्मचारियों ने चेतावनी दी कि उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो 18 नवंबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की जाएगी। वहीं, दूसरी ओर इस मामले में मुकदमा दर्ज होने के बाद कांग्रेस नेता विनोद दनोसी ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कार्रवाई को राजनीतिक द्वेष से प्रेरित बताया है।
डीएफओ महत्तिम यादव की तहरीर पर पुलिस ने विनोद दनोसी निवासी गडोली सहित अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। तहरीर के अनुसार, प्रदर्शनकारियों से बातचीत के दौरान डीएफओ के साथ धक्का-मुक्की और मारपीट की गई। घटना में घायल डीएफओ का जिला अस्पताल में उपचार कराया गया।
एसडीओ आयशा बिष्ट ने भी आरोप लगाया कि घटनास्थल पर कुछ लोगों ने उनके साथ अभद्रता और धक्का-मुक्की की। तहसीलदार के साथ भी दुर्व्यवहार किया गया और दोनों अधिकारियों को एक कमरे में बंद कर दिया गया। बाद में मौके पर पहुंचे डीएफओ के साथ भी मारपीट की गई। रेंजर नक्षत्र ने कहा कि अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ इस तरह की घटनाएं विभागीय मनोबल को प्रभावित करती हैं। वन विभाग संगठन के अध्यक्ष कपिल ने कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग उठाई। कोतवाल जयपाल नेगी के अनुसार, मामले की जांच एसआई प्रवीण रावत को सौंपी गई है।
मुकदमे के विरोध में कांग्रेस नेता ने उठाए सवाल
इधर, मुकदमा दर्ज होने के विरोध में कांग्रेस नेता विनोद दनोसी ने प्रेसवार्ता कर वन विभाग और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने मुकदमे को आधारहीन और राजनीति से प्रेरित बताते हुए आरोप लगाया कि जनता की आवाज दबाने के लिए कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
दनोसी ने कहा कि वन विभाग स्थानीय लोगों की जंगली जानवरों के आतंक, चारा-पत्ती और वन पंचायतों के अधिकारों से जुड़ी समस्याओं का समाधान करने में विफल रहा है। कांग्रेस कार्यकर्ताओं और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने इन्हीं मुद्दों को लेकर विरोध दर्ज कराया था, लेकिन समस्याओं का समाधान निकालने के बजाय मुकदमे दर्ज कराए गए।
उन्होंने आरोप लगाया कि डीएफओ और स्थानीय वन प्रशासन सत्ताधारी पक्ष के दबाव में काम कर रहा है। दनोसी ने कहा कि शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन करना और ज्ञापन देना लोकतंत्र में नागरिकों एवं जनप्रतिनिधियों का अधिकार है। यदि अधिकारी जनसमस्याओं की अनदेखी करेंगे तो जनता का सड़कों पर उतरना स्वाभाविक है।
उन्होंने चेतावनी दी कि मुकदमे वापस नहीं लिए गए और जनसमस्याओं का शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो पूरे जिले में व्यापक जन आंदोलन शुरू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि मुकदमों और कानूनी कार्रवाई की चेतावनी से कांग्रेस कार्यकर्ता पीछे हटने वाले नहीं हैं।
जिला कांग्रेस अध्यक्ष विनोद नेगी ने भी विनोद दनोसी का समर्थन करते हुए कहा कि उन्होंने जनहित के मुद्दों को लेकर आंदोलन किया था और एनएसयूआई के कार्यकर्ता भी उनके साथ थे। उन्होंने आरोप लगाया कि जनसमस्याएं उठाने वालों के खिलाफ मुकदमे दर्ज करना उचित नहीं है। कांग्रेस नेताओं ने इस कार्रवाई को तानाशाही रवैया बताते हुए आंदोलन को आगे बढ़ाने की चेतावनी दी है।
इस घटनाक्रम के बाद क्षेत्र में वन विभाग और स्थानीय लोगों के बीच तनाव की स्थिति बनी हुई है। एक ओर वन विभाग के कर्मचारी अपनी सुरक्षा और अधिकारियों के साथ हुई कथित मारपीट के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर स्थानीय जनता और कांग्रेस नेता गुलदार के आतंक से निजात दिलाने तथा वन विभाग की जवाबदेही तय करने की मांग उठा रहे हैं। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
Reported By: Praveen Bhardwaj












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