उत्तराखंड सिविल एविएशन डेवलपमेंट अथॉरिटी के हेलीकॉप्टर चार्टर ऑपरेटरों के पंजीकरण संबंधी दिशा-निर्देशों को लेकर राज्य के एविएशन सेक्टर में सुरक्षा मानकों और नियामकीय पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। उत्तराखंड के दुर्गम भूगोल और उच्च जोखिम वाले हवाई मार्गों के कारण यह मुद्दा और भी संवेदनशील माना जा रहा है।
दिशा-निर्देशों के अनुसार, किसी भी ऑपरेटर के लिए पिछले दो वर्षों का दुर्घटना-मुक्त संचालन रिकॉर्ड एक महत्वपूर्ण पात्रता शर्त है। इसी संदर्भ में एक ऑपरेटर के रिकॉर्ड को लेकर कुछ घटनाओं का उल्लेख सार्वजनिक चर्चा में आया है, जिनमें वर्ष 2019, 2023 और 2024 में हुई अलग-अलग हेलीकॉप्टर घटनाएं शामिल बताई जा रही हैं।
सूत्रों के अनुसार, वर्ष 2022 में संचालन पर अस्थायी निलंबन और वर्ष 2025 में केदारनाथ सेक्टर में बिना पूर्व अनुमति उड़ान संचालन को लेकर भी कार्रवाई की बात सामने आई थी। साथ ही, कंपनी से जुड़े निदेशक के पूर्व कानूनी मामलों का उल्लेख भी चर्चा में है, जिससे पूरे मामले ने और तूल पकड़ लिया है।
एविएशन विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तराखंड जैसे संवेदनशील हवाई क्षेत्र में सुरक्षा मानकों में किसी भी प्रकार की ढील गंभीर जोखिम पैदा कर सकती है। उनका कहना है कि नियमों का समान और सख्त अनुपालन ही हवाई सुरक्षा की बुनियाद है।
फिलहाल उत्तराखंड सिविल एविएशन डेवलपमेंट अथॉरिटी या संबंधित ऑपरेटर की ओर से इस पूरे मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, उठते सवालों के बीच पारदर्शी और स्वतंत्र जांच की मांग तेज हो गई है, ताकि एविएशन सुरक्षा मानकों पर जनता का भरोसा बना रहे।
Reported By: Arun Sharma












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