कैबिनेट मंत्री एवं आपदा प्रबंधन व पुनर्वास मंत्री मदन कौशिक ने रुद्रप्रयाग पहुंचकर जिला कार्यालय सभागार में आपदा प्रबंधन, मानसून तैयारियों, पुनर्वास कार्यों और श्री केदारनाथ धाम यात्रा व्यवस्थाओं की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने जनपद की आपदा संवेदनशीलता को देखते हुए सभी विभागों को अलर्ट मोड पर रहने और आपसी समन्वय व टीम भावना के साथ कार्य करने के निर्देश दिए।
समीक्षा बैठक में मंत्री ने आपदा की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्रों, बंद एवं बाधित सड़क मार्गों, उपलब्ध मशीनरी, राहत एवं खोज-बचाव दलों, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, डीडीआरएफ और क्यूआरटी की उपलब्धता की जानकारी ली। इसके साथ ही आवश्यक संसाधनों, हेलीपैडों की स्थिति, मानसून के दौरान क्षतिग्रस्त सरकारी परिसंपत्तियों, आरवीएनएल की निर्माणाधीन सुरंगों और वित्तीय वर्ष 2026-27 में आपदा प्रबंधन बजट के व्यय की स्थिति की भी समीक्षा की। केदारनाथ पैदल मार्ग और यात्रा व्यवस्थाओं को लेकर भी अधिकारियों से जानकारी ली गई।
बंद सड़कों को जल्द खोलने के निर्देश
लंबे समय से बंद पड़े सड़क मार्गों को लेकर मंत्री ने नाराजगी जताई। उन्होंने संबंधित विभागों को प्राथमिकता के आधार पर काम करते हुए मार्गों को जल्द सुचारू करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आपदा के मद्देनजर राज्य सरकार आवश्यक संसाधन और बजट उपलब्ध करा रही है, ऐसे में प्रभावित क्षेत्रों में राहत और पुनर्स्थापना कार्यों में किसी भी प्रकार की देरी नहीं होनी चाहिए।
उन्होंने उप जिलाधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में सड़कों और अन्य महत्वपूर्ण परिसंपत्तियों की नियमित निगरानी करने को कहा। साथ ही सड़कों पर मलबा आने या मार्ग क्षतिग्रस्त होने की स्थिति में इंपैनल की गई मशीनों को तत्काल मौके पर भेजने के निर्देश दिए, ताकि मलबा हटाकर यातायात जल्द बहाल किया जा सके। उन्होंने मशीनरी और उपकरणों की उपलब्धता व उनकी लोकेशन की अद्यतन जानकारी रखने को भी कहा।
अगस्त्यमुनि और तिलवाड़ा में जलभराव पर मांगा ड्रेनेज प्लान
बैठक में अगस्त्यमुनि, तिलवाड़ा समेत अन्य बाजार क्षेत्रों में बारिश के दौरान होने वाले जलभराव की समस्या पर भी चर्चा हुई। मंत्री ने संबंधित विभागों को जलभराव के स्थायी समाधान के लिए प्रभावी ड्रेनेज प्लान तैयार कर कार्ययोजना उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि मानसून के दौरान जल निकासी की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि स्थानीय लोगों और यात्रियों को परेशानी का सामना न करना पड़े।
क्षतिग्रस्त परिसंपत्तियों का समयबद्ध आकलन
मदन कौशिक ने पेयजल, विद्युत आपूर्ति, सिंचाई नहरों, आयुष अस्पतालों, पंचायत भवनों समेत अन्य महत्वपूर्ण सार्वजनिक परिसंपत्तियों की स्थिति की भी जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश देते हुए कहा कि आपदा से प्रभावित विद्यालयों और अन्य संस्थानों के पुनर्स्थापना कार्यों के लिए राज्य सरकार आवश्यक बजट उपलब्ध करा रही है।
उन्होंने संबंधित विभागों को क्षतिग्रस्त परिसंपत्तियों का समयबद्ध आकलन कर पुनर्स्थापना की कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा।
पीपलकोटी घटना का भी किया उल्लेख
मंत्री मदन कौशिक ने कहा कि राज्य सरकार आपदा प्रबंधन को पूरी संवेदनशीलता और प्राथमिकता के साथ देख रही है। उन्होंने हाल ही में पीपलकोटी में हुई घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री, प्रभारी मंत्री और उनके द्वारा स्वयं ग्राउंड जीरो पर पहुंचकर राहत एवं बचाव कार्यों की निगरानी की गई।
उन्होंने कहा कि संभावित आपदाओं को देखते हुए प्रदेश में लगातार प्रशिक्षण, मॉक ड्रिल और विशेषज्ञों की सहायता से आपदा प्रबंधन की तैयारियों को मजबूत किया जा रहा है। केंद्र सरकार से भी आवश्यक सहयोग मिल रहा है। भारतीय सेना, एनडीआरएफ और अन्य केंद्रीय एजेंसियां आपदा के समय महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी
मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि खराब मौसम के दौरान शासन स्तर से लगातार निगरानी की जा रही है और मुख्यमंत्री भी उच्चस्तरीय बैठकों के माध्यम से आवश्यक दिशा-निर्देश दे रहे हैं। उन्होंने अधिकारियों से अपनी जिम्मेदारियों का पूरी निष्ठा और तत्परता से निर्वहन करने को कहा।
मदन कौशिक ने स्पष्ट किया कि मानसून के दौरान किसी भी आपदा की स्थिति में राहत एवं बचाव कार्यों में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। संवेदनशील क्षेत्रों की नियमित निगरानी, आवश्यक मशीनरी व उपकरणों की उपलब्धता, त्वरित राहत-बचाव और बाधित मार्गों को शीघ्र सुचारू करना सभी विभागों की प्राथमिकता होनी चाहिए।
Reported By: Arun Sharma












Discussion about this post