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उत्तराखण्ड में नर्सिंग अधिकारियों की भर्ती को लेकर एक बार फिर विवाद गहरा गया है। लंबे समय से भर्ती प्रक्रिया का इंतजार कर रहे हजारों बेरोजगार नर्सिंग अभ्यर्थियों ने सरकार से मांग की है कि नर्सिंग अधिकारियों की भर्ती को अंतिम बार वर्षवार (Year-wise) आधार पर पूरा किया जाए, ताकि वर्षों से चयन से वंचित अभ्यर्थियों को न्याय मिल सके।
इस संबंध में नर्सिंग एकता मंच उत्तराखण्ड ने स्वास्थ्य मंत्री के माध्यम से शासन को ज्ञापन भेजा है। वहीं स्वास्थ्य महानिदेशालय ने भी शासन से इस मामले में निर्णय लेने का अनुरोध किया है।

महानिदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण द्वारा सचिव चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि वर्तमान भर्ती प्रक्रिया के कारण कई बैचों के अभ्यर्थी चयन से बाहर रह गए हैं। मंच का दावा है कि पूर्व में 3000 पदों पर हुई भर्ती में कुछ बैचों के अभ्यर्थियों का चयन वर्षवार प्रणाली के तहत हो गया, जबकि समान योग्यता रखने वाले हजारों उम्मीदवार आज भी नियुक्ति का इंतजार कर रहे हैं।
अभ्यर्थियों का कहना है कि वरिष्ठ बैचों और कनिष्ठ बैचों को अवसर मिल गया, लेकिन बीच के तीन से चार बैच पूरी तरह उपेक्षित रह गए। उनका आरोप है कि पूर्व भर्ती में रिक्त रह गए पदों, फर्जी प्रमाणपत्रों के कारण निरस्त चयन और डुप्लीकेट आवेदनों से खाली हुई सीटों पर भी पात्र उम्मीदवारों को मौका नहीं दिया गया।
नर्सिंग एकता मंच ने सरकार के सामने तीन प्रमुख मांगें रखी हैं। पहली मांग वर्तमान भर्ती प्रक्रिया को अंतिम बार वर्षवार आधार पर पूरा करने की है। दूसरी मांग भविष्य की भर्ती में न्यूनतम दो वर्ष का क्लीनिकल अनुभव अनिवार्य करने की है, जबकि तीसरी मांग चयन प्रक्रिया में सख्त अनुशासनात्मक प्रावधान जोड़ने की है, ताकि मरीजों के जीवन से जुड़ी लापरवाही पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित हो सके।
महानिदेशालय की ओर से शासन को भेजे गए पत्र में उत्तराखण्ड अधीनस्थ नर्सिंग (अराजपत्रित) सेवा नियमावली 2015, 2020 और 2022 के संशोधनों का भी उल्लेख किया गया है। पत्र में बताया गया कि वर्ष 2015 में भर्ती प्रक्रिया डिप्लोमा और डिग्री परीक्षा के अंकों के आधार पर होती थी, जबकि 2020 में संशोधन कर लिखित परीक्षा लागू की गई। वर्ष 2022 में चयन वर्ष 2022-23 के लिए विशेष रूप से वर्षवार चयन प्रणाली लागू की गई थी, जो बाद में समाप्त मानी गई।
अब नर्सिंग एकता मंच इसी व्यवस्था को अंतिम बार लागू करने की मांग कर रहा है। महानिदेशक सुनीता टम्टा ने शासन से इस विषय पर जल्द निर्णय लेने का अनुरोध किया है।
इधर भर्ती प्रक्रिया में देरी और अनिश्चितता को लेकर बेरोजगार नर्सिंग अभ्यर्थियों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। अभ्यर्थियों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार जल्द फैसला नहीं लेती तो प्रदेशभर में आंदोलन तेज किया जाएगा। वहीं स्वास्थ्य विभाग के भीतर भी इस मुद्दे को संवेदनशील माना जा रहा है, क्योंकि राज्य के सरकारी अस्पतालों में नर्सिंग स्टाफ की कमी पहले से ही बड़ी चुनौती बनी हुई है।
नवल पुंडीर,अध्यक्ष नर्सिंग एकता मंच
ज्योति रौतेला
प्रदेश अध्यक्ष महिला कांग्रेस
गणेश गोदियाल, कांग्रेस प्रदेश अध्य्क्ष












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