उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय, हरिद्वार में आयोजित सात दिवसीय “वैकल्पिक एवं प्राकृतिक चिकित्सा कार्यशाला” का सफलतापूर्वक समापन हो गया। 27 अप्रैल से 4 मई 2026 तक चली इस कार्यशाला का आयोजन विश्वविद्यालय के योग विज्ञान विभाग द्वारा किया गया, जिसमें 220 छात्रों ने सक्रिय भागीदारी की।
इस कार्यशाला में विश्वविद्यालय परिसर के साथ-साथ हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, शिमला एवं संबद्ध महाविद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने भी भाग लिया। प्रतिभागियों को योग, प्राकृतिक चिकित्सा और वैकल्पिक उपचार पद्धतियों के विभिन्न आयामों की गहन जानकारी दी गई, जिससे उनके ज्ञान और कौशल में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।
कार्यशाला के संयोजक एवं योग विज्ञान विभागाध्यक्ष लक्ष्मीनारायण जोशी ने बताया कि सात दिनों तक चले इस कार्यक्रम में पंचकर्म, योग चिकित्सा, आहार चिकित्सा, जल चिकित्सा, सूर्य चिकित्सा, प्राणायाम और ध्यान जैसे विषयों पर विशेषज्ञों द्वारा व्याख्यान और व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। उन्होंने कहा कि इस तरह की पहल विद्यार्थियों के समग्र विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
समापन कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति रमाकांत पांडेय ने की। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली में योग और प्राकृतिक चिकित्सा का महत्व तेजी से बढ़ा है। योग न केवल रोगों के उपचार में सहायक है, बल्कि मानसिक संतुलन और सकारात्मक जीवनशैली के लिए भी आवश्यक है।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि नितिन गौतम ने कहा कि प्राकृतिक चिकित्सा और योग आज स्वास्थ्य संरक्षण के प्रभावी साधन बन चुके हैं। वहीं, हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय से आईं अर्पिता जोशी ने कार्यशाला की सराहना करते हुए इसे विद्यार्थियों के लिए बेहद उपयोगी बताया और भविष्य में ऐसे कार्यक्रमों के निरंतर आयोजन की आवश्यकता पर जोर दिया।
यह कार्यशाला पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक विज्ञान के समन्वय का एक सशक्त उदाहरण साबित हुई, जिसने विद्यार्थियों को स्वास्थ्य और जीवनशैली के प्रति जागरूक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
Reported By: Arun sharma












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