अंतर्राष्ट्रीय युवा दिवस पर परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती ने देश और विश्व के युवाओं से आह्वान किया कि वे राष्ट्र की सांस, धड़कन, शक्ति और भविष्य हैं। उन्होंने कहा कि युवा केवल आज के नागरिक नहीं, बल्कि कल के निर्माता हैं, और उनकी ऊर्जा, ज्ञान व संस्कार ही राष्ट्र की दिशा तय करते हैं।
स्वामीजी ने जोर देकर कहा कि सफलता के साथ संस्कार और सेवा का समावेश आवश्यक है। आधुनिक ज्ञान व तकनीक के साथ सनातन मूल्य और मातृभूमि से प्रेम जोड़ने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि जीवन का उद्देश्य केवल लेना नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र को लौटाना भी है।
युवाओं से आग्रह करते हुए स्वामीजी ने कहा कि सच्ची सफलता व्यक्तिगत उपलब्धियों से आगे बढ़कर समाज व राष्ट्र के उत्थान में है। अनुशासन, नैतिकता और सेवा भाव अपनाकर हर युवा करियर के साथ चरित्र में भी ऊंचा हो।
भारत की “वसुधैव कुटुम्बकम” की भावना को आगे बढ़ाने की अपील करते हुए उन्होंने कहा कि युवाओं को संपूर्ण मानवता के लिए कार्य करना चाहिए और समय का उपभोक्ता नहीं, बल्कि निर्माता बनना चाहिए। स्वामीजी ने युवाओं को संकल्प लेने के लिए प्रेरित किया कि वे अपने जीवन को समाज और राष्ट्र के उत्थान के लिए समर्पित करें।
Reported By: Arun Sharma












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