टिहरी पंप स्टोरेज प्रोजेक्ट (पीएसपी)-1000 मेगावाट, जो देश की सबसे रणनीतिक हाइड्रोपावर बैलेंसिंग सुविधाओं में से एक है, अपने अंतिम कमीशनिंग चरण में पहुंच गया है। परियोजना की चार में से दो यूनिट पहले ही वाणिज्यिक रूप से शुरू हो चुकी हैं, जबकि यूनिट-3 और यूनिट-4 भी शीघ्र ही कमीशन होने वाली हैं। इन यूनिटों के शुरू होते ही उत्तरी ग्रिड को 1000 मेगावाट की महत्वपूर्ण पीकिंग क्षमता प्राप्त होगी।
यह पीएसपी मौजूदा टिहरी और कोटेश्वर जलाशयों को ऊपरी और निचले बेसिन के रूप में उपयोग करते हुए एक क्लोज्ड-लूप “वॉटर रीसाइक्लिंग” सिस्टम पर आधारित है। ऑफ-पीक समय में जल ऊपरी जलाशय में पंप किया जाता है और पीक डिमांड के दौरान उसी जल से विद्युत उत्पादन किया जाता है। यह मॉडल लोड बैलेंसिंग, फ्रीक्वेंसी स्थिरीकरण और विशेषकर शाम की पीक मांग पूरी करने में अत्यधिक प्रभावी साबित होता है।
भागीरथी नदी के बाईं ओर स्थित भूमिगत पावर हाउस में 250 मेगावाट क्षमता की चार रिवर्सिबल यूनिटें स्थापित हैं। परियोजना पूरी तरह कमीशन होने पर टिहरी पीएसपी 1000 मेगावाट की पीकिंग बिजली प्रदान करेगा और टिहरी हाइड्रो पावर कॉम्प्लेक्स की कुल क्षमता बढ़कर 2400 मेगावाट हो जाएगी।
आखिरी यूनिट पर कार्य निर्धारित समय के अनुसार जारी है और इसकी कमीशनिंग निकट भविष्य में पूरी होने की उम्मीद है। विशेषज्ञों के अनुसार, नवीकरणीय ऊर्जा के बढ़ते विस्तार के बीच टिहरी पीएसपी जैसे ग्रिड-बैलेंसिंग एसेट ऊर्जा प्रणाली की स्थिरता और लचीलेपन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
Reported By: Arun Sharma











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