द्वितीय केदार के नाम से प्रसिद्ध के कपाट गुरुवार को श्रद्धा, भक्ति और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधिवत खोल दिए गए। पूर्वाह्न 11:30 बजे कर्क लग्न में कपाट खुलने के साथ ही सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भगवान मदमहेश्वर के दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित किया। कपाटोत्सव के अवसर पर मंदिर को भव्य रूप से फूलों से सजाया गया था।
इस अवसर पर (बीकेटीसी) के अध्यक्ष ने देश-विदेश के श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भगवान मदमहेश्वर का आशीर्वाद सभी भक्तों पर बना रहे। वहीं बीकेटीसी के मुख्य कार्याधिकारी ने बताया कि यात्रा को सुचारु रूप से संचालित करने के लिए व्यापक तैयारियां की गई हैं।
बीकेटीसी मीडिया प्रभारी के अनुसार भगवान मदमहेश्वर की चल विग्रह डोली 19 मई को से प्रथम पड़ाव के लिए रवाना हुई थी। 20 मई को डोली हकहकूकधारियों के गांव गौंडार पहुंची और गुरुवार सुबह वहां से प्रस्थान कर मदमहेश्वर धाम पहुंची।
कपाट खुलने की प्रक्रिया पुजारी शिवशंकर लिंग द्वारा विधिवत पूजा-अर्चना और वैदिक अनुष्ठानों के साथ संपन्न कराई गई। इस दौरान भगवान मदमहेश्वर के स्वयंभू शिवलिंग को समाधि रूप से श्रृंगार रूप प्रदान किया गया। कपाट खुलने से पहले भगवान मदमहेश्वर की चल विग्रह डोली ने भंडार कक्ष तक अवलोकन किया।
श्री ओंकारेश्वर मंदिर प्रभारी ने बताया कि कपाट खुलने के दिन 1135 श्रद्धालु दर्शन के लिए मदमहेश्वर धाम पहुंचे।
Reported By: Praveen Bhardwaj












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