लोकसभा के शीतकालीन सत्र में नैनीताल–उधम सिंह नगर के सांसद और पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री अजय भट्ट द्वारा पूछे गए प्रश्न पर केंद्रीय पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने पर्वतीय पर्यटन सर्किटों के विकास संबंधी विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की। मंत्री ने बताया कि स्वदेश दर्शन, स्वदेश दर्शन 2.0 और प्रसाद योजनाओं के तहत हिमालयी राज्यों में अब तक 76 परियोजनाएं स्वीकृत की जा चुकी हैं।
केंद्र सरकार ने वर्ष 2024-25 में विशेष सहायता योजना के अंतर्गत 23 राज्यों में 3295.76 करोड़ रुपये की 40 परियोजनाओं को मंजूरी दी है, जिनका लक्ष्य प्रतिष्ठित पर्यटन स्थलों का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विकास और ब्रांडिंग करना है।
उत्तराखंड में स्वीकृत प्रमुख परियोजनाएं एवं धनराशि
केदारनाथ (2015-16) – 34.77 करोड़
बद्रीनाथ धाम (2018-19) – 56.15 करोड़ (38.38 करोड़ जारी)
गंगोत्री–यमुनोत्री (2021-22) – 54.36 करोड़ (10.5 करोड़ जारी)
ऋषिकेश राफ्टिंग बेस स्टेशन (2024-25) – 100 करोड़ (66 करोड़ स्वीकृत)
चंपावत टी-गार्डन अनुभव (2023-24) – 19.89 करोड़ (1.99 करोड़ जारी)
गूंजी ग्रामीण पर्यटन क्लस्टर (2023-24) – 17.86 करोड़ (1.79 करोड़ जारी)
माणा वाइब्रेंट विलेज (2024-25) – 4.99 करोड़ (0.50 करोड़ जारी)
कैंची धाम विकास – 17.5 करोड़ (1.76 करोड़ जारी)
जांदूंग वाइब्रेंट विलेज – 4.99 करोड़ (0.50 करोड़ जारी)
कुमाऊं विरासत परिपथ (2016-17) – 76.32 करोड़ (68.91 करोड़ जारी)
टिहरी झील एडवेंचर स्पोर्ट्स (2015-16) – 59.7 करोड़ (पूरी राशि जारी)
केंद्रीय मंत्री शेखावत के अनुसार, देश के सभी हिमालयी राज्यों के पर्यटन सर्किटों के विकास के लिए अब तक 1726.74 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें से 1200.46 करोड़ रुपये पहले ही जारी किए जा चुके हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य पर्वतीय पर्यटन को सुरक्षित, आकर्षक और विश्वस्तरीय सुविधाओं से युक्त बनाना है।
Reported by: Shiv Nararyan












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