भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) रुड़की में अनुसंधान की दृश्यता, अंतर्विषयी सहयोग और सामाजिक प्रभाव को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एएनआरएफ एवं आईआईटी रुड़की अनुसंधान एवं प्रभाव सम्मेलन-2026 का आयोजन किया गया। राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन के सहयोग से आयोजित एक दिवसीय सम्मेलन में एएनआरएफ के नेतृत्व, संकाय सदस्यों, अनुसंधान अनुदान प्राप्तकर्ताओं, परास्नातक शोधकर्ताओं, डॉक्टरेट शोधार्थियों और युवा शोधकर्ताओं ने प्रतिभाग किया।
उद्घाटन समारोह में आईआईटी रुड़की के निदेशक प्रो. के.के. पंत, प्रो. पोननुरंगम कुमारगुरु सहित संस्थान के वरिष्ठ अधिकारी, संकाय सदस्य और शोधकर्ता मौजूद रहे।
सम्मेलन का उद्देश्य इस विचार को आगे बढ़ाना रहा कि उत्कृष्ट अनुसंधान केवल किए जाने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उसे प्रभावी ढंग से संप्रेषित करने, विभिन्न क्षेत्रों से जोड़ने और सामाजिक प्रभाव में परिवर्तित करने की दिशा में भी प्रयास किए जाने चाहिए। कार्यक्रम में विभिन्न विषयों के शोधकर्ताओं को अपने विचार साझा करने, अनुसंधान कार्यों पर चर्चा करने और संभावित सहयोग की संभावनाएं तलाशने का अवसर मिला।
सम्मेलन का प्रमुख आकर्षण एएनआरएफ अनुदान प्राप्तकर्ता मिलन रहा, जिसमें 50 से अधिक संक्षिप्त अनुसंधान प्रस्तुतियां दी गईं। इनमें मूलभूत विज्ञान, उन्नत सामग्री, कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं इलेक्ट्रॉनिक्स, जैव-प्रौद्योगिकी एवं स्वास्थ्य सेवा, बुनियादी ढांचा, जलवायु एवं जल विज्ञान, पृथ्वी विज्ञान, नवीकरणीय ऊर्जा तथा पर्यावरणीय स्थिरता जैसे क्षेत्रों में किए जा रहे अनुसंधान को प्रस्तुत किया गया।
प्रस्तुत अनुसंधान में क्वांटम सामग्री, अतिचालकता, सतत उत्प्रेरण, दवा वितरण, अल्जाइमर रोग, स्मार्ट स्वास्थ्य निगरानी, मीथेन उत्सर्जन, नदी प्रणालियों में एंटीबायोटिक प्रदूषण, पेरोव्स्काइट सौर सेल, लिथियम पुनर्प्राप्ति, सतत बुनियादी ढांचा, इलेक्ट्रिक वाहन तकनीक और अगली पीढ़ी के वायरलेस संचार जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल रहे।
कार्यक्रम में सरल कृत्रिम बुद्धिमत्ता विषय पर एक व्यावहारिक सत्र भी आयोजित किया गया। इसमें विभिन्न प्रारूपों और भाषाओं में अनुसंधान को प्रभावी ढंग से प्रसारित करने तथा वैज्ञानिक ज्ञान को आमजन के लिए अधिक सुलभ बनाने में प्रौद्योगिकी की भूमिका पर प्रकाश डाला गया। आईआईटी रुड़की द्वारा अनुसंधान की दृश्यता बढ़ाने के प्रयासों के तहत शोधकर्ताओं को पारंपरिक अकादमिक प्रकाशनों के अलावा डिजिटल माध्यमों के जरिए अपने शोध, नवाचार और तकनीकों को व्यापक स्तर पर प्रस्तुत करने के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है।
सम्मेलन के दौरान “भविष्य की अनुसंधान प्राथमिकताओं की पहचान: चुनौतियां और संभावित समाधान” विषय पर एएनआरएफ के साथ खुली चर्चा हुई। इसमें संकाय सदस्यों और शोधकर्ताओं ने उभरते अनुसंधान क्षेत्रों, वर्तमान चुनौतियों तथा राष्ट्रीय अनुसंधान पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के संभावित अवसरों पर एएनआरएफ के प्रतिनिधियों के साथ संवाद किया।
कार्यक्रम के समापन चरण में पीएचडी विद्यार्थियों के पोस्टर भ्रमण एवं संवाद का आयोजन किया गया। इसमें कुल 77 पोस्टर प्रदर्शित किए गए। पोस्टरों में वास्तुकला, रासायनिक एवं सिविल इंजीनियरिंग, भूकंप इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स, नवीकरणीय ऊर्जा, मैकेनिकल इंजीनियरिंग, रसायन विज्ञान, जैव-विज्ञान, कंप्यूटर विज्ञान, फोटोनिक्स, भौतिकी, पृथ्वी विज्ञान, जल विज्ञान और जल संसाधन सहित विभिन्न क्षेत्रों के अनुसंधान को शामिल किया गया। विशेषज्ञ मूल्यांकनकर्ताओं ने शोधार्थियों के साथ संवाद कर उनके कार्यों पर चर्चा की।
एक ही दिन में 50 से अधिक त्वरित अनुसंधान प्रस्तुतियों और 77 पोस्टरों सहित 127 से अधिक अनुसंधान प्रस्तुतियां सम्मेलन का हिस्सा बनीं। आयोजन ने शोधकर्ताओं को एक-दूसरे के कार्यों को समझने, नए सहयोग की संभावनाएं तलाशने और जटिल वैज्ञानिक अनुसंधान को संक्षिप्त एवं सरल रूप में प्रस्तुत करने का मंच प्रदान किया।
एएनआरएफ एवं आईआईटी रुड़की अनुसंधान एवं प्रभाव सम्मेलन-2026 के माध्यम से अनुसंधान उत्कृष्टता को दृश्यता, अंतर्विषयी सहयोग और सामाजिक प्रभाव से जोड़ने की दिशा में संस्थान की प्रतिबद्धता को मजबूती मिली। सम्मेलन ने स्थापित एवं युवा शोधकर्ताओं को अपने कार्यों को व्यापक स्तर पर प्रस्तुत करने और राष्ट्रीय अनुसंधान पारिस्थितिकी तंत्र में नए संवाद एवं सहयोग की संभावनाएं विकसित करने का अवसर प्रदान किया।
Reported By: Arun Sharma











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