ऋषि पंचमी का पर्व भारतीय संस्कृति की जड़ों और ऋषियों की अमूल्य परंपरा का स्मरण कराता है। परमार्थ निकेतन में इस अवसर पर विशेष पूजन-अर्चन हुआ। स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि ऋषियों के तप और ज्ञान से ही भारतीय संस्कृति आज भी जीवंत है। योग, आयुर्वेद, ज्योतिष, गणित और दर्शन जैसे खजाने ऋषियों की ही देन हैं।
स्वामी जी ने कहा कि आज जब समाज आधुनिकता और तकनीक पर निर्भर हो गया है, तब ऋषि पंचमी हमें अपनी आध्यात्मिक जड़ों की ओर लौटने की प्रेरणा देती है। एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) हमें सुविधा तो दे सकता है, लेकिन जीवन की दिशा और उद्देश्य केवल ऋषियों के ज्ञान और मूल्यों से ही प्राप्त होते हैं। उन्होंने “ऋषि इंटेलिजेंस” को पुनः आत्मसात करने का आह्वान किया।
स्वामी जी ने कहा कि टेक्नोलॉजी साधन देती है, पर साध्य नहीं। मशीनें काम आसान बना सकती हैं, लेकिन मन और आत्मा की शांति ऋषियों की परंपरा से ही मिलती है। विज्ञान और अध्यात्म का संतुलन ही मानवता की वास्तविक प्रगति का मार्ग है।
ऋषि पंचमी का संदेश है कि आधुनिकता के साथ हमें ऋषि बुद्धि और जीवन मूल्यों को भी अपनाना होगा। तभी जीवन समृद्ध, संतुलित और सफल बन सकेगा।
Reported By: Arun Sharma














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