
विरासत महोत्सव-2026 के तहत सोमवार को हिमालयन सांस्कृतिक केंद्र, नींबूवाला में आयोजित ‘विरासत साधना’ में स्कूली बच्चों और विभिन्न शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थियों ने भारतीय शास्त्रीय नृत्य की मनमोहक प्रस्तुतियां दीं। रिच संस्था की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में 25 स्कूलों और संस्थानों के प्रतिभागियों ने भरतनाट्यम और कथक के माध्यम से अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
कार्यक्रम में बच्चों की प्रस्तुतियों के जरिए भारतीय शास्त्रीय नृत्य की समृद्ध परंपरा, अनुशासन और भावाभिव्यक्ति की सुंदर झलक देखने को मिली। प्रतिभागियों ने पूरे उत्साह और समर्पण के साथ अपनी कला प्रस्तुत की। कार्यक्रम में मौजूद अतिथियों और दर्शकों ने बच्चों की प्रस्तुतियों की सराहना की।
कार्यक्रम में हिल फाउंडेशन स्कूल की हृदयानही उप्रेती, द अर्काडिया स्कूल की वैभवी मुडगल, हिल फाउंडेशन डांस एंड म्यूजिक अकादमी की कीर्ति यादव, सरस्वती संगीत मंदिर की साफिया समायरा, सेंट जोसेफ्स अकादमी की इक्षिता अग्रवाल और माउंट फोर्ट अकादमी की प्रगति गुलाटी ने प्रस्तुति दी।
इसके अलावा पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय आईआईपी की प्रज्ञा खंडूरी, नादांता डांस अकादमी की नताशा टोंक, अनाहत अकादमी ऑफ कथक एंड योग की अदिति भट्ट, सोपान संस्कार स्कूल की जानशी, ग्ली म्यूजिक अकादमी की पार्निका झा और नृत्ययोग कथक इंस्टीट्यूट की रियांशी कोकिल्याल ने भी अपनी नृत्य प्रतिभा दिखाई।
ब्राइटलैंड्स स्कूल की प्रकृति धीमान, पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय ऑर्डनेंस फैक्ट्री की वेदांशी अत्री, द दून स्कूल की पूर्वा सानिडी, निर्मल नृत्यांगन म्यूजिक एंड डांस अकादमी की नंदिनी भट्ट, न्यू दून ब्लॉसम्स स्कूल की कनिष्का जांगिड़, माउंट लिटेरा जी स्कूल की सान्वी शर्मा और डीएवी पीजी कॉलेज की मृगनयनी ने भी प्रस्तुतियों से दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया।
वहीं, कॉन्वेंट ऑफ जीसस एंड मैरी की स्वस्ति गुप्ता, श्यामा प्रसाद मुखर्जी कॉलेज फॉर विमेन की सोम्या चौहान, आईएमएस यूनिसन यूनिवर्सिटी की मृणालिनी सिंह, देवभूमि उत्तराखंड यूनिवर्सिटी की पलक और स्मॉल बेल्स मल्टी एक्टिविटी हब की आराध्या ने भी कार्यक्रम में हिस्सा लिया। मृणालिनी सिंह की प्रस्तुति में दिव्यम कुमार ने संगत की। कार्यक्रम में आसरा ट्रस्ट सहित अन्य प्रतिभागियों की प्रस्तुतियों का भी उल्लेख किया गया।
विरासत साधना का उद्देश्य बच्चों और युवाओं को भारतीय शास्त्रीय नृत्य की समृद्ध परंपराओं से जोड़ना और उन्हें अपनी कला प्रदर्शित करने के लिए मंच उपलब्ध कराना है। कार्यक्रम ने युवा पीढ़ी में शास्त्रीय नृत्य के प्रति रुचि और उत्साह को बढ़ावा देने के साथ सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने का संदेश दिया।
Reported By: Arun sharma













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