उत्तराखंड में लगातार बढ़ रही खाद (उर्वरक) की कमी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। बुवाई के बाद फसलों के लिए सबसे महत्वपूर्ण समय में किसानों को यूरिया और डीएपी जैसी जरूरी खाद उपलब्ध नहीं हो पा रही है, जिससे खेती और उत्पादन पर सीधा असर पड़ने लगा है। प्रदेश के कई जिलों में किसान खाद के लिए घंटों लंबी कतारों में खड़े रहने को मजबूर हैं।
किसानों का आरोप है कि समस्या केवल खाद की कमी तक सीमित नहीं है, बल्कि वितरण व्यवस्था की खामियां, बढ़ती कीमतें और कालाबाजारी भी संकट को गंभीर बना रही हैं। कई स्थानों पर जमाखोरी के चलते कृत्रिम कमी पैदा की जा रही है, जिससे किसानों को अधिक दामों पर खाद खरीदनी पड़ रही है।
मंगलौर विधायक काज़ी निजामुद्दीन ने भी खाद संकट पर नाराजगी जाहिर करते हुए सरकार और विभागीय व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सहकारी समितियों और सरकारी वितरण केंद्रों पर अव्यवस्था, सीमित स्टॉक और लंबी कतारों के कारण किसानों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
वहीं डीएपी जैसी खाद की लगातार बढ़ती कीमतों ने किसानों की लागत बढ़ा दी है, जिससे उनका मुनाफा घटता जा रहा है। इस पूरे संकट का सबसे अधिक असर छोटे और सीमांत किसानों पर पड़ रहा है, जो पहले से ही आर्थिक दबाव झेल रहे हैं।
राजीव चौधरी (किसान)
आदित्य राणा (पूर्व राज्यमंत्री)
क़ाजी निजामुद्दीन (विधायक मंगलौर)
Reported By: Praveen Bhardwaj












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