
उत्तराखंड की राजनीति में करीब 23 साल पुराने जेनी प्रकरण ने शनिवार को नया और बेहद गंभीर मोड़ ले लिया। वर्ष 2003 में तत्कालीन मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत पर यौन शोषण और अपने बच्चे का पिता होने का आरोप लगाने वाली जेनी ने आज शनिवार को उत्तरांचल प्रेस क्लब में पत्रकार वार्ता कर अपनी आपबीती सुनाई। उन्होंने हरक सिंह रावत पर दुष्कर्म का सीधा आरोप लगाते हुए कहा कि उनका ऐसा शोषण हुआ, जैसा शायद किसी अन्य महिला के साथ नहीं हुआ होगा। उन्होंने दावा किया कि उन्हें मानसिक अस्पताल में रखा गया, जहां उनसे जबरन हस्ताक्षर कराए गए। उनके इस बयान से प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज होने के आसार हैं।नक्शे देखें
जेनी ने पत्रकार वार्ता में कहा कि जिस समय उन्हें मानसिक अस्पताल में रखा गया, उस दौरान उनकी मानसिक स्थिति बेहद खराब हो चुकी थी। उन्होंने आरोप लगाया कि सीबीआइ के अधिकारी उनसे मिलने केवल एक बार अस्पताल आए थे। उस समय वह पूरी तरह मानसिक रूप से टूट चुकी थीं। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि उस समय उनकी परिस्थितियों और मानसिक स्थिति को समझने का प्रयास क्यों नहीं किया गया। हालांकि, इन आरोपों के समर्थन में प्रस्तुत दस्तावेजों और संबंधित अस्पताल के अभिलेखों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।
‘मेरा बेटा 23 साल से बिना पिता के रह रहा, उसे नाम चाहिए’
पत्रकार वार्ता में जेनी ने अपने 23 वर्षीय बेटे का जिक्र करते हुए कहा कि वह इतने वर्षों से पिता के नाम और पहचान के बिना जीवन बिता रहा है। उन्होंने कहा कि उनके बेटे को उसका नाम मिलना चाहिए। जेनी ने बेटे का डीएनए परीक्षण कराने की मांग भी उठाई। उनका कहना था कि इतने वर्षों से उनके बच्चे की पहचान को लेकर राजनीति होती रही, लेकिन किसी ने उसके भविष्य और अधिकारों की चिंता नहीं की।
(उर्फ)जैनी पीड़ित महिला
Reported By: Crime Patrol













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