भारतीय निशानेबाजी जगत को शुक्रवार को उस समय बड़ा झटका लगा, जब देश के दिग्गज निशानेबाज, राष्ट्रीय कोच और पद्मश्री सम्मानित जसपाल राणा का 49 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके निधन की खबर से पूरे खेल जगत में शोक की लहर दौड़ गई है।
जानकारी के अनुसार, जसपाल राणा पिछले कुछ दिनों से अस्वस्थ चल रहे थे और नई दिल्ली के साकेत स्थित मैक्स अस्पताल में उनका उपचार चल रहा था। हाल ही में म्यूनिख से लौटने के दौरान उनकी तबीयत बिगड़ गई थी, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उपचार के दौरान उन्हें दिल का दौरा पड़ा, जिससे उनका निधन हो गया।
जसपाल राणा भारतीय निशानेबाजी इतिहास के सबसे सफल खिलाड़ियों में शामिल रहे। उन्होंने एशियाई खेलों, राष्ट्रमंडल खेलों और कई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत के लिए अनेक पदक जीतकर देश का गौरव बढ़ाया। खेलों में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें वर्ष 1994 में अर्जुन पुरस्कार, वर्ष 1997 में पद्मश्री तथा वर्ष 2020 में द्रोणाचार्य पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
एक खिलाड़ी के साथ-साथ कोच के रूप में भी उनका योगदान अतुलनीय रहा। उन्होंने देश के कई युवा निशानेबाजों को प्रशिक्षण देकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई। विशेष रूप से ओलंपिक पदक विजेता मनु भाकर के करियर को नई दिशा देने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। मनु भाकर ने भी पेरिस ओलंपिक में अपने दो कांस्य पदकों का श्रेय अपने कोच जसपाल राणा को दिया था।
मूल रूप से उत्तरकाशी से संबंध रखने वाले जसपाल राणा उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि पूरे देश के खेल जगत का गौरव थे। उनकी उपलब्धियों और समर्पण ने हजारों युवाओं को खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए प्रेरित किया।
उनके निधन पर खेल संगठनों, खिलाड़ियों, प्रशिक्षकों और विभिन्न क्षेत्रों की प्रमुख हस्तियों ने गहरा शोक व्यक्त किया है। सभी ने उन्हें भारतीय खेल जगत का एक महान खिलाड़ी, प्रेरक कोच और दूरदर्शी मार्गदर्शक बताते हुए भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की है।
जसपाल राणा का निधन भारतीय खेलों के लिए एक अपूरणीय क्षति है। उनकी उपलब्धियां, संघर्ष और खेलों के प्रति समर्पण आने वाली पीढ़ियों को सदैव प्रेरित करता रहेगा।
रेखा आर्या, कैबिनेट मंत्री उत्तराखंड सरकार
Reported By: Arun Sharma












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