उत्तराखंड में एक ओर जनता पानी, सड़क और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं की मांग कर रही है, वहीं दूसरी ओर विधायकों की विकास निधि का बड़ा हिस्सा अब तक खर्च नहीं हो पाया है। आरटीआई से सामने आई जानकारी के मुताबिक प्रदेश के विधायकों को अब तक कुल 1,664 करोड़ रुपये की विकास निधि मिली, जिसमें से करीब 66 प्रतिशत राशि ही खर्च हो सकी है। यानी लगभग 573 करोड़ रुपये की निधि अभी खर्च नहीं हुई है।
आरटीआई से सामने आए आंकड़ों ने विधायकों की विकास निधि के इस्तेमाल को लेकर सवाल खड़े किए हैं। रिपोर्ट में क्षेत्रवार और दलवार खर्च में भी अंतर सामने आया है। आंकड़ों के मुताबिक मैदानी क्षेत्रों के विधायक विकास निधि खर्च करने में पहाड़ी क्षेत्रों के विधायकों से आगे हैं। ऐसे में पहाड़ों में सड़क, पेयजल और बिजली जैसी बुनियादी जरूरतों को देखते हुए निधि के कम खर्च होने को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
वहीं, दलवार आंकड़ों में कांग्रेस विधायकों की ओर से विकास निधि खर्च करने की रफ्तार भाजपा विधायकों की तुलना में अधिक बताई गई है। इसके अलावा प्रदेश सरकार के पांच कैबिनेट मंत्री विकास निधि खर्च करने के मामले में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से पीछे हैं।
हालांकि, भाजपा विधायक विनोद चमोली ने विकास निधि खर्च नहीं होने को सीधे तौर पर विकास कार्यों के नहीं होने से जोड़ने पर असहमति जताई। उन्होंने कहा कि निधि खर्च करने की प्रक्रिया में टेंडर और अन्य औपचारिकताओं के कारण समय लगता है। हर विधायक की अपनी रणनीति होती है और उसी के अनुसार निधि का उपयोग किया जाता है।
चमोली ने यह भी कहा कि भाजपा विधायकों के पास सरकार की विभिन्न योजनाओं के जरिए विकास कार्य कराने के लिए अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध हैं, जबकि विपक्षी विधायकों के पास विकास कार्यों के लिए मुख्य रूप से विधायक निधि का ही माध्यम है।
विकास निधि के करोड़ों रुपये खर्च नहीं होने का मुद्दा ऐसे समय में सामने आया है, जब प्रदेश के कई क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर सड़क, पेयजल और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं को लेकर लगातार मांग उठती रही है। अब आरटीआई से सामने आए आंकड़ों के बाद निधि आवंटन से लेकर उसके इस्तेमाल और विकास कार्यों की गति पर बहस तेज हो सकती है।
विनोद चमोली, विधायक, भाजपा।
Reported By: Praveen Bhardawj












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