हल्द्वानी में किडनी स्टोन के ऑपरेशन के बाद मरीज की मौत के मामले में न्यायालय के आदेश पर आखिरकार एक निजी अस्पताल और उसके चिकित्सकों के खिलाफ मेडिकल नेग्लिजेंस का मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। कई महीनों तक कार्रवाई नहीं होने के बाद पीड़ित परिवार ने अदालत का दरवाजा खटखटाया, जिसके बाद पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।
किशनपुर घुड़दौड़ा निवासी भरत मोहन सिंह ने अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, हल्द्वानी की अदालत में प्रार्थना पत्र देकर आरोप लगाया कि उनके बड़े भाई ललित मोहन सिंह की सितंबर 2025 में किडनी स्टोन के ऑपरेशन के दौरान चिकित्सकीय लापरवाही के कारण मौत हो गई। शिकायत के अनुसार, डॉ. बृजमोहन जोशी ने ऑपरेशन को सामान्य प्रक्रिया बताते हुए 24 सितंबर 2025 को मुखानी रोड स्थित द प्राइड हॉस्पिटल में सर्जरी की थी।
परिजनों का आरोप है कि ऑपरेशन के बाद अस्पताल ने मरीज की हालत सामान्य बताई, लेकिन शाम होते-होते अचानक सांस लेने में दिक्कत होने की बात कहकर उन्हें दूसरे अस्पताल रेफर कर दिया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। परिजनों का कहना है कि अस्पताल की ओर से मौत के कारणों को लेकर कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया।
पीड़ित परिवार ने घटना के बाद मुख्य चिकित्सा अधिकारी, कोतवाली हल्द्वानी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से शिकायत की, लेकिन कार्रवाई नहीं होने पर न्यायालय की शरण ली। याचिका में पोस्टमार्टम रिपोर्ट और चिकित्सकीय तथ्यों में विरोधाभास का भी उल्लेख करते हुए अस्पताल प्रबंधन, डॉक्टरों और संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई थी।
एसपी सिटी मनोज कत्याल ने बताया कि न्यायालय के आदेश और शिकायत के आधार पर हल्द्वानी के निजी अस्पताल के चिकित्सकों के खिलाफ मेडिकल नेग्लिजेंस सहित संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। उन्होंने कहा कि मामले की विवेचना शुरू कर दी गई है और जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
इस मामले ने एक बार फिर निजी अस्पतालों में उपचार के दौरान जवाबदेही और चिकित्सकीय लापरवाही को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मनोज कत्याल एसपी सिटी
Reported By: Praveen Bhardwaj











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