नेपाल से धार्मिक यात्रा पर भारत पहुंचे एक प्रतिनिधिमंडल ने विश्वविख्यात आध्यात्मिक तीर्थस्थल परमार्थ निकेतन का पावन भ्रमण किया। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने परमार्थ निकेतन में आयोजित दिव्य गंगा आरती में सहभाग किया और मां गंगा के पावन तट पर भारतीय संस्कृति, सनातन परंपराओं और आध्यात्मिक वातावरण का अनुभव किया।
नेपाल से पहुंचे प्रतिनिधिमंडल का परमार्थ गुरुकुल के ऋषिकुमारों ने आत्मीय स्वागत किया। इस अवसर पर परमार्थ निकेतन के स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने भारत और नेपाल के बीच सदियों पुराने आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक संबंधों पर प्रकाश डाला।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि भारत और नेपाल के संबंध केवल दो देशों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि साझा संस्कृति, आध्यात्मिक चेतना, तीर्थ परंपरा और सनातन मूल्यों से जुड़े हृदयों के संबंध हैं। दोनों देशों की धरती भगवान श्रीराम, माता सीता, भगवान पशुपतिनाथ, भगवान बुद्ध और हिमालय की महान आध्यात्मिक परंपराओं से जुड़ी हुई है।
विश्व को शांति और संतुलन का संदेश देती भारतीय संस्कृति
स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि भारतीय संस्कृति की सबसे बड़ी शक्ति उसकी समावेशिता, सह-अस्तित्व और विश्वकल्याण की भावना है। भारत ने दुनिया को केवल भौतिक प्रगति का मार्ग नहीं दिखाया, बल्कि जीवन को संतुलित, शांतिपूर्ण और सार्थक बनाने की दृष्टि भी दी है।
उन्होंने कहा कि योग शरीर, मन और आत्मा को जोड़ता है, आयुर्वेद प्रकृति के साथ संतुलन का संदेश देता है और मां गंगा पवित्रता एवं निरंतर प्रवाह की प्रेरणा देती हैं। भारतीय दर्शन ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना के माध्यम से पूरी मानवता को एक परिवार के रूप में देखने का संदेश देता है।
उन्होंने कहा कि आधुनिक जीवन की चुनौतियों के बीच आज दुनिया शांति, संतुलन, करुणा और आंतरिक आनंद की तलाश में भारत की ओर आकर्षित हो रही है। योग, ध्यान, आयुर्वेद, अध्यात्म, भारतीय संगीत, नृत्य, दर्शन, मंदिर परंपराएं और तीर्थ यात्राएं दुनिया भर के लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रही हैं।
भारत-नेपाल संबंधों को मजबूत करती हैं धार्मिक यात्राएं
स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि भारतीय संस्कृति किसी एक समुदाय, क्षेत्र या देश तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मानवता को जोड़ने वाली चेतना है। भारत और नेपाल का संबंध हिमालय और गंगा की तरह सनातन और अविच्छिन्न है।
उन्होंने कहा कि नेपाल में भगवान पशुपतिनाथ की आराधना हो या भारत में भगवान शिव और मां गंगा की उपासना, दोनों देशों की आध्यात्मिक चेतना एक-दूसरे से गहराई से जुड़ी हुई है। इस तरह की धार्मिक एवं सांस्कृतिक यात्राएं भारत और नेपाल के बीच मैत्री, आध्यात्मिक एकता और सांस्कृतिक संबंधों को और मजबूत करती हैं।
इस अवसर पर प्रतिनिधिमंडल को स्वामी चिदानन्द सरस्वती द्वारा रचित सद्साहित्य भी भेंट किया गया। प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने साहित्य को श्रद्धापूर्वक स्वीकार करते हुए कहा कि भारतीय आध्यात्मिक साहित्य जीवन को भीतर से देखने और समझने की प्रेरणा देता है।
Reported By: Arun Sharma











Discussion about this post