
उत्तराखंड के नए राज्यपाल डॉ. ढाल सिंह बिसेन का देवभूमि आगमन पर पूज्य संतों ने हरित अभिनंदन कर आत्मीय स्वागत किया। इस अवसर पर परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती, योगगुरु स्वामी रामदेव सहित अन्य संतों ने उन्हें नए दायित्व के लिए बधाई और शुभकामनाएं दीं। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी मौजूद रहे।
संतों ने डॉ. ढाल सिंह बिसेन के सफल, गरिमामय और जनकल्याणकारी कार्यकाल की कामना करते हुए उम्मीद जताई कि उनके कार्यकाल में संवैधानिक मूल्यों, सामाजिक सद्भाव, जनहित और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण को प्रोत्साहन मिलेगा।
इस अवसर पर स्वामी चिदानंद सरस्वती ने उन्हें नवीन दायित्व के लिए शुभकामनाएं देते हुए जनसेवा और लोककल्याण के कार्यों को प्राथमिकता देने की प्रेरणा दी। संतों ने कहा कि राज्यपाल का संवैधानिक दायित्व जनविश्वास को मजबूत करने, सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने और लोकतांत्रिक मूल्यों के संरक्षण की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
हरित अभिनंदन से दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश
डॉ. ढाल सिंह बिसेन के स्वागत के दौरान हरित अभिनंदन के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया गया। इस पहल के जरिए प्रकृति के प्रति कृतज्ञता और विकास के साथ पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के महत्व को रेखांकित किया गया। संतों ने वृक्षों, नदियों, पर्वतों और वनों को भारत की प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक विरासत का अभिन्न अंग बताया।
आध्यात्मिक विरासत और जनसेवा पर जोर
मध्य प्रदेश के सिवनी से देवभूमि उत्तराखंड पहुंचे डॉ. बिसेन का स्वागत करते हुए संतों ने उत्तराखंड की समृद्ध आध्यात्मिक परंपरा, योग, ध्यान और सनातन संस्कृति का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि हिमालय और मां गंगा की पावन भूमि पर संवैधानिक दायित्व का निर्वहन जनसेवा और लोककल्याण के लिए महत्वपूर्ण अवसर है।
संतों ने विश्वास जताया कि डॉ. बिसेन अपने कार्यकाल में सुशासन, सामाजिक सद्भाव और जनहित को प्राथमिकता देंगे। इस अवसर पर उन्हें संत परंपरा के सेवा, करुणा, सद्भाव और निःस्वार्थ समर्पण के मूल्यों के अनुरूप कार्य करने की शुभकामनाएं दी गईं।
कार्यक्रम के अंत में संतों ने डॉ. ढाल सिंह बिसेन के मंगलमय कार्यकाल की कामना करते हुए उनका अभिनंदन किया।
Reported By: Arun Sharma












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