
महानवमी के पावन अवसर पर मां कात्यायनी मंदिर में श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ कन्या पूजन, कन्या भोज और विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। मंदिर के व्यवस्थापक गुरविंदर सलूजा ने विधि-विधान से कन्याओं का पूजन कर उन्हें भोजन कराया। नवरात्र के दौरान मंदिर में प्रतिदिन माता की चौकियों और भंडारों का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लिया। सोमवार को धार्मिक अनुष्ठानों के साथ नवरात्र कार्यक्रम का विधिवत समापन हुआ।
इस अवसर पर गुरविंदर सलूजा ने कहा कि महानवमी शक्ति की आराधना, मातृशक्ति के सम्मान और नारी के दिव्य स्वरूप के वंदन का पर्व है। कन्या पूजन भारतीय संस्कृति की सुंदर आध्यात्मिक परंपरा है, जो हमें याद दिलाती है कि नारी सृजन, संवेदना, शक्ति, ज्ञान और करुणा की जीवंत अभिव्यक्ति है। हालांकि, कन्या पूजन तभी सार्थक है, जब समाज हर दिन बेटियों की गरिमा, अधिकारों और संभावनाओं का सम्मान करे।
उन्होंने कहा कि कन्याओं को केवल भोजन कराना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें शिक्षा, सुरक्षा, सम्मान और समान अवसर देकर आत्मनिर्भर बनाना भी जरूरी है। बेटियों को अपने पैरों पर खड़ा करने के साथ उनके सपनों को पूरा करने के अवसर देने चाहिए, ताकि वे आत्मविश्वास के साथ अपने जीवन के फैसले स्वयं ले सकें।
बेटियों को समान अधिकार और अवसर देना समाज की जिम्मेदारी
गुरविंदर सलूजा ने कहा कि यदि हम कन्याओं में मां दुर्गा का स्वरूप देखते हैं, तो उनकी शिक्षा, आत्मविश्वास और स्वावलंबन को भी उतना ही महत्व देना होगा। बेटियों के रास्ते से भेदभाव, असुरक्षा और अवसरों की असमानता दूर करना परिवार और समाज की जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि बेटियों को आगे बढ़ाने का अर्थ केवल अवसर उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि उन बाधाओं को दूर करना भी है, जो उनके सपनों की राह में आती हैं। परिवारों को बेटियों के विचारों को सुनना, उनकी शिक्षा को प्राथमिकता देना और उनकी क्षमताओं पर विश्वास करना चाहिए। प्रत्येक बेटी को अपनी प्रतिभा पहचानने, स्वतंत्र पहचान बनाने और समाज के निर्माण में समान भागीदारी निभाने का अवसर मिलना चाहिए।
साधना से जागृत होते हैं विवेक और करुणा
महानवमी के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए महामंडलेश्वर प्रकाशानंद ने कहा कि साधना का उद्देश्य केवल बाहरी अनुष्ठानों को पूरा करना नहीं, बल्कि अपने भीतर सद्बुद्धि, विवेक, करुणा और आत्मसंयम को जागृत करना भी है। मां सिद्धिदात्री की आराधना आध्यात्मिक उन्नति, ज्ञान और जीवन की पूर्णता की प्रेरणा देती है।
उन्होंने कहा कि हमारी शक्ति सेवा का माध्यम बने और हमारा ज्ञान समाज के कल्याण में योगदान दे, यही आध्यात्मिक साधना का वास्तविक उद्देश्य है। मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना हमें शक्ति, साहस, धैर्य, करुणा और ज्ञान जैसे गुणों को अपने व्यवहार में अपनाने की प्रेरणा देती है।
महामंडलेश्वर प्रकाशानंद ने कहा कि कन्या पूजन की सार्थकता ऐसे समाज के निर्माण में है, जहां प्रत्येक बेटी सुरक्षित हो और उसे समान अधिकार, सम्मान तथा निर्भय होकर जीवन जीने की स्वतंत्रता मिले।
नवरात्र के दौरान मंदिर में आयोजित धार्मिक कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। महानवमी पर कन्या पूजन, कन्या भोज और विशाल भंडारे के साथ कार्यक्रमों का समापन हुआ।
Reported By: Arun Sharma












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