उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी संयुक्त मंच के नेतृत्व में राज्य आंदोलनकारी अपनी लंबित मांगों को लेकर पिछले 62 दिनों से लगातार धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। आंदोलनकारियों का आरोप है कि इतने लंबे समय से आंदोलन के बावजूद शासन-प्रशासन की ओर से उनकी मांगों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।
सोमवार को आंदोलनकारियों को सूचना दी गई थी कि सिटी मजिस्ट्रेट ज्ञापन लेने के लिए धरना स्थल पर पहुंचेंगे। आंदोलनकारी काफी देर तक अधिकारी का इंतजार करते रहे, लेकिन जब कोई अधिकारी वहां नहीं पहुंचा तो उनका आक्रोश बढ़ गया। इसके बाद आंदोलनकारी मजबूरन डीएम कार्यालय पहुंचे और शासन-प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी कर प्रदर्शन किया।
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दो प्रमुख मांगों को लेकर आंदोलन
राज्य आंदोलनकारियों का कहना है कि वे पिछले 62 दिनों से अपनी दो प्रमुख मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। पहली मांग है कि राज्य आंदोलनकारी और उनके आश्रितों को आरक्षित श्रेणी के अभ्यर्थियों की नियुक्ति का लाभ दिया जाए। वहीं दूसरी मांग चिह्नीकरण के लंबित प्रकरणों के निस्तारण के लिए कैबिनेट कमेटी का गठन करने की है।
आंदोलनकारियों का आरोप है कि वर्ष 2013 से उनकी मांग लंबित है, लेकिन अब तक सरकार की ओर से इस दिशा में अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई। उनका कहना है कि लगातार धरना देने के बावजूद सुनवाई नहीं होने के कारण उन्हें डीएम कार्यालय पहुंचकर प्रदर्शन करने को मजबूर होना पड़ा।
10 फीसदी क्षैतिज आरक्षण का लाभ देने की मांग
राज्य आंदोलनकारियों ने कहा कि राज्य सरकार की ओर से उन्हें 10 फीसदी क्षैतिज आरक्षण देने की घोषणा की गई है, लेकिन इसका वास्तविक लाभ अभी तक आंदोलनकारियों और पात्र अभ्यर्थियों को नहीं मिल पाया है। इसी मुद्दे को लेकर आंदोलनकारी लगातार सरकार के खिलाफ धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं।
आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उनका कहना है कि सरकार को लंबित मामलों का जल्द निस्तारण कर राज्य आंदोलनकारियों को उनके अधिकार का लाभ देना चाहिए।
आंदोलनकारियों की नाराजगी का केंद्र केवल लंबा धरना नहीं, बल्कि 10 फीसदी क्षैतिज आरक्षण और लंबित चिह्नीकरण मामलों पर सरकार की कार्रवाई है।
बिशम्भर दत्त नौटियाल, जिलाध्यक्ष चिन्हित राज्य आदोलनकारी समिति देहरादून
Reported By: Shiv Narayan











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