परमार्थ निकेतन में माँ गंगा को चुनरी अर्पित कर “चुनरी महामहोत्सव” अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के साथ सम्पन्न हुआ। इस पावन अवसर पर परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती एवं रमेशभाई ओझा ने देश-विदेश से आए श्रद्धालुओं के साथ माँ गंगा की विधिवत पूजा-अर्चना कर चुनरी अर्पित की तथा राष्ट्र की समृद्धि, विश्व शांति और मानवता के कल्याण के लिए प्रार्थना की।
गंगा तट पर वैदिक मंत्रोच्चारण और शंख ध्वनि के बीच माँ गंगा को चुनरी अर्पित की गई। इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने माँ गंगा के प्रति अपनी आस्था व्यक्त करते हुए समस्त सृष्टि की सुख-समृद्धि और कल्याण की कामना की। आयोजन के दौरान बताया गया कि चुनरी मातृत्व, शक्ति और सम्मान का प्रतीक मानी जाती है।
कार्यक्रम में भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत का भी स्मरण किया गया। रवीन्द्रनाथ टैगोर और महाराणा प्रताप जैसी महान विभूतियों के योगदान को याद करते हुए कहा गया कि एक ने अपने साहित्य और गीतों से राष्ट्र चेतना को स्वर दिया, जबकि दूसरे ने स्वाभिमान और मातृभूमि की रक्षा के लिए अपना जीवन समर्पित किया।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि माँ गंगा भारत की आध्यात्मिक चेतना की जीवनरेखा हैं और हमारी संस्कृति, सभ्यता तथा संस्कारों की संवाहिका हैं। उन्होंने गंगा की निर्मलता, अविरलता और पवित्रता बनाए रखने के लिए जनसहभागिता और संरक्षण के प्रति समर्पण का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि चुनरी महोत्सव समाज में प्रेम, एकता, सेवा और संस्कारों की भावना को प्रज्वलित करता है तथा नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति और आध्यात्मिक जड़ों से जोड़ने का सशक्त माध्यम है।
इस अवसर पर रमेशभाई ओझा जी ने कहा कि भारतीय संस्कृति में नदियों को माता का स्थान दिया गया है क्योंकि वे बिना किसी भेदभाव के सभी को जीवन प्रदान करती हैं। उन्होंने कहा कि गंगा को चुनरी अर्पित करना प्रकृति के प्रति सम्मान और कृतज्ञता की सनातन परंपरा का प्रतीक है। उन्होंने आधुनिकता के बीच प्रकृति संरक्षण और सांस्कृतिक मूल्यों को बनाए रखने की आवश्यकता पर भी बल दिया।
परमार्थ निकेतन द्वारा आयोजित यह चुनरी महामहोत्सव श्रद्धा, संस्कृति, प्रकृति संरक्षण और विश्व कल्याण के संदेश को समर्पित एक जीवंत आध्यात्मिक आयोजन के रूप में सम्पन्न हुआ।
Reported By: Arun Sharma












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