नैनीताल: ईंधन के वैश्विक संकट और राष्ट्र पर इसके बढ़ते आर्थिक व पर्यावरणीय प्रभाव को देखते हुए उत्तराखंड उच्च न्यायालय (High Court) ने समाज के सामने एक अनूठी और प्रेरणादायक मिसाल पेश की है। आज उत्तराखंड हाईकोर्ट में विशेष रूप से ‘नो व्हीकल डे’ (No Vehicle Day) मनाया गया। इस अभियान के तहत पर्यावरण और ईंधन संरक्षण का संदेश देने के लिए मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice) मनोज कुमार गुप्ता सहित उच्च न्यायालय के सभी न्यायमूर्ति (Judges) अपने सरकारी वाहनों को छोड़कर पैदल चलकर न्यायालय पहुंचे।
न्यायाधीशों के इस कदम की न सिर्फ कोर्ट परिसर बल्कि पूरे प्रदेश में जमकर सराहना की जा रही है।
मुख्य न्यायाधीश की अपील: ईंधन संकट से निपटने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी
पैदल चलकर कोर्ट पहुंचने के बाद मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता ने इस अभियान के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने देश के वर्तमान हालातों को देखते हुए निम्नलिखित मुख्य बातें कहीं:
नागरिकों का संयुक्त प्रयास: वर्तमान में देश जिस ईंधन संकट से गुजर रहा है, उससे निपटने के लिए समाज के सभी नागरिकों के संयुक्त और जागरूक प्रयासों की बेहद आवश्यकता है।
कर्मचारियों से विशेष आग्रह: मुख्य न्यायाधीश ने उच्च न्यायालय परिसर में स्थित अन्य सभी सरकारी विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों से भी अपील की है कि वे आज के दिन अपने निजी या सरकारी वाहनों का उपयोग बिल्कुल न करें।
अभियान में योगदान की मांग: उन्होंने आम जनमानस से भी इस ईंधन बचाओ अभियान को सफल बनाने के लिए आगे आने और अपने स्तर पर योगदान देने का अनुरोध किया है।
भविष्य के लिए बेहतर कदम: इस तरह के सांकेतिक और व्यावहारिक कदमों से न सिर्फ भारी मात्रा में ईंधन की बचत होगी, बल्कि पर्यावरण को भी प्रदूषण से बचाया जा सकेगा।
हाईकोर्ट परिसर में दिखा व्यापक असर
मुख्य न्यायाधीश और समस्त न्यायमूर्तियों की इस अनूठी पहल का असर उच्च न्यायालय के वकीलों, स्टाफ और परिसर में स्थित अन्य कार्यालयों पर भी साफ देखने को मिला। कई वकीलों और कर्मचारियों ने भी आज अपने वाहनों का इस्तेमाल न कर पैदल या सार्वजनिक परिवहन का उपयोग किया। उत्तराखंड हाईकोर्ट की इस पहल ने यह साबित कर दिया है कि देश और पर्यावरण की सुरक्षा के लिए बड़े बदलावों की शुरुआत स्वयं से ही करनी होती है।
Reported By: Rajesh Kumar











Discussion about this post