एम्स ऋषिकेश में विश्व अस्थमा दिवस के अवसर पर बाल रोग और आयुष विभाग के संयुक्त तत्वावधान में शैक्षिक और नैदानिक कार्यक्रमों की श्रृंखला आयोजित की गई। वर्ष 2026 की वैश्विक थीम “अस्थमा से पीड़ित सभी लोगों के लिए सूजनरोधी इनहेलर की उपलब्धता अभी भी अत्यावश्यक” के अनुरूप कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य रोगियों के निदान और दीर्घकालिक प्रबंधन के बीच की खाई को पाटना रहा।
कार्यक्रम में संस्थान की निदेशक एवं सीईओ डॉ. मीनू सिंह ने अस्थमा की रोगक्रिया, पर्यावरणीय नियंत्रण और नियमित फॉलो-अप की आवश्यकता पर विस्तार से व्याख्यान दिया। उन्होंने कार्यक्रम के दौरान बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण भी किया और उनकी समस्याओं, दवा उपयोग तथा इनहेलर के सही तरीके को समझाते हुए व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया।
इस अवसर पर डॉ. प्रशांत कुमार वर्मा ने अस्थमा नियंत्रण में प्रतिरक्षा उपायों, संतुलित आहार, जीवनशैली में सुधार और दैनिक सावधानियों की भूमिका पर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। कार्यक्रम में प्रो. लोकेश तिवारी, डॉ. व्यास राठौर, आयुष विभागाध्यक्ष डॉ. मोनिका पठानिया, डॉ. श्वेता मिश्रा और डॉ. मृणालिनी सहित कई विशेषज्ञों ने भी अपने विचार रखे और रोग से संबंधित आवश्यक जानकारी दी।
कॉलेज ऑफ नर्सिंग के विद्यार्थियों ने अस्थमा के निदान और बचाव को लेकर पोस्टर के माध्यम से जनजागरूकता फैलाने का कार्य किया। इस दौरान मरीजों को एमडीआई (मीटरड डोज इनहेलर) के सही उपयोग, नेबुलाइज़र, पीईएफआर मॉनिटरिंग, पर्यावरणीय नियंत्रण और योगाभ्यास के महत्व के बारे में विस्तार से बताया गया।
कार्यक्रम के अंतर्गत विशेषज्ञ चिकित्सकों ने मरीजों की फॉलो-अप जांच भी की और उन्हें हर बुधवार दोपहर 2 बजे आयोजित होने वाली बाल चिकित्सा पल्मोनोलॉजी क्लिनिक तथा टेली फॉलो-अप सेवाओं के बारे में जानकारी दी। मरीजों को इन सेवाओं का लाभ उठाने और नियमित चिकित्सा परामर्श लेने के लिए प्रेरित किया गया।
यह कार्यक्रम अस्थमा रोगियों के लिए जागरूकता, सही उपचार और बेहतर जीवनशैली अपनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ।
Reported By: Arun sharma










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