चीन सीमा से सटे जोहार घाटी क्षेत्र में मोबाइल संचार सेवाओं को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। मुनस्यारी बचाओ संघर्ष समिति ने भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) पर लीलम और बोगड्यार में स्थापित मोबाइल टावरों के संचालन को लेकर भ्रामक जानकारी देने का आरोप लगाया है।
समिति के अनुसार बीएसएनएल ने 27 मई 2026 को जारी एक पत्र में दावा किया था कि लीलम और बोगड्यार के मोबाइल टावरों को क्रियाशील कर दिया गया है। हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि दोनों टावर आज भी बंद पड़े हैं और क्षेत्र में किसी प्रकार का मोबाइल सिग्नल उपलब्ध नहीं हो रहा है।
बूंगा निवासी मनोहर सिंह रावत द्वारा भेजे गए पत्र के जवाब में बीएसएनएल हल्द्वानी के सहायक महाप्रबंधक (प्रचालन) ने बताया था कि जोहार क्षेत्र में 14 बीएसएनएल टावर प्रस्तावित हैं तथा लीलम और बोगड्यार के टावरों को सक्रिय कर दिया गया है। लेकिन स्थानीय लोगों का दावा है कि धरातल पर स्थिति पत्र में किए गए दावों के विपरीत है।
मल्ला जोहार की क्षेत्र पंचायत सदस्य लक्ष्मी रलमाल ने बताया कि दोनों टावरों का निर्माण कार्य करीब दो वर्ष पहले पूरा हो चुका है, लेकिन अब तक उन्हें संचालित नहीं किया गया है। ग्रामीण लगातार इन टावरों को शुरू करने की मांग कर रहे हैं।
समिति के संयोजक जगत सिंह मर्तोलिया ने कहा कि सीमा क्षेत्र में संचार सुविधाओं को लेकर गलत जानकारी देना गंभीर विषय है। उन्होंने आरोप लगाया कि बीएसएनएल के पत्र से विभाग की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हुए हैं।
समिति ने केंद्रीय संचार मंत्री को पत्र भेजकर मामले की जांच और कथित रूप से गलत जानकारी देने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि 15 दिनों के भीतर लीलम और बोगड्यार के टावरों से मोबाइल सिग्नल शुरू नहीं हुए तो जन आंदोलन शुरू किया जाएगा। समिति ने इस मामले को राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा विषय बताते हुए इसकी शिकायत गृह मंत्रालय से करने की भी बात कही है।
Reported By: Arun sharma












Discussion about this post