हरिद्वार से सटे चीला क्षेत्र में जल विद्युत परियोजना की कॉलोनी में रह रहे मजदूरों के आवासों पर बुलडोजर चलाए जाने का मामला सामने आया है। कार्रवाई के बाद आउटसोर्स और संविदा कर्मचारियों के साथ ही कॉलोनी में सफाई समेत अन्य काम करने वाले मजदूरों के सामने भी रहने का संकट खड़ा हो गया है।
बताया जा रहा है कि जल विद्युत परियोजना चीला की कॉलोनी में कार्रवाई के दौरान मजदूरों के आवासों को ध्वस्त कर दिया गया। इसके बाद प्रभावित परिवारों को अपना सामान घरों से बाहर निकालना पड़ा। मजदूरों का कहना है कि बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के उन्हें आवास खाली करने के लिए मजबूर किया गया, जिसके चलते परिवार और सामान लेकर खुले आसमान के नीचे रहने की नौबत आ गई है।
कार्रवाई से मजदूरों में नाराजगी
कॉलोनी में हुई बुलडोजर कार्रवाई के बाद मजदूरों में नाराजगी है। प्रभावित लोगों का कहना है कि वे लंबे समय से परियोजना से जुड़े विभिन्न कार्यों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इनमें आउटसोर्स और संविदा कर्मचारी तथा कॉलोनी में सफाई का काम करने वाले मजदूर भी शामिल हैं।
मजदूरों का आरोप है कि आवास खाली कराने से पहले उनके रहने की कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई। अचानक हुई कार्रवाई के बाद परिवारों के सामने सिर छिपाने के लिए जगह का संकट पैदा हो गया है। उनका कहना है कि छोटे बच्चों और घरेलू सामान के साथ खुले में रहने की स्थिति बेहद मुश्किल है।
आवास और अधिकारों को लेकर उठे सवाल
चीला प्रोजेक्ट कॉलोनी में आवासों को ध्वस्त किए जाने के बाद मजदूरों के आशियाने और उनके अधिकारों को लेकर सवाल उठने लगे हैं। प्रभावित मजदूरों का कहना है कि यदि परियोजना प्रबंधन को आवास खाली कराने थे तो पहले उनके लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जानी चाहिए थी।
बुलडोजर कार्रवाई के बाद अब मजदूरों की मांग है कि उनके रहने की समस्या का तत्काल समाधान किया जाए और प्रभावित परिवारों के लिए वैकल्पिक आवास की व्यवस्था की जाए। वहीं, पूरे मामले को लेकर परियोजना प्रबंधन का पक्ष सामने आने के बाद ही कार्रवाई की परिस्थितियों और आवास खाली कराने के कारणों की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।
Reportede By: Praveen Bhardwaj












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