मुख्यमंत्री सेवा सदन में कुसुम कान्ता फाउंडेशन के स्थापना दिवस के अवसर पर छात्रवृत्ति वितरण एवं ‘ज्ञान गंगा सम्मान समारोह’ आयोजित किया गया। कुसुम कान्ता फाउंडेशन एवं मंथन वेलफेयर सोसाइटी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 40 से अधिक प्रतिभाशाली छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति प्रदान की।
समारोह में उत्तराखंड के 13 उत्कृष्ट शिक्षकों के साथ गढ़वाल और कुमाऊं मंडल के एनएसएस समन्वयकों को भी उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन और राष्ट्रगान के साथ हुआ।
शिक्षा और प्रतिभा को प्रोत्साहन समाज की साझा जिम्मेदारी
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने छात्र-छात्राओं को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि हर प्रतिभा को आगे बढ़ने के लिए अवसर, उचित मार्गदर्शन और प्रोत्साहन मिलना जरूरी है। उन्होंने कहा कि छात्रवृत्ति जैसी पहल विद्यार्थियों को अपने सपनों को पूरा करने के लिए नई ऊर्जा, आत्मविश्वास और विश्वास प्रदान करती है।
मुख्यमंत्री ने कुसुम कान्ता फाउंडेशन और मंथन वेलफेयर सोसाइटी के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि शिक्षा और प्रतिभा को प्रोत्साहित करना पूरे समाज की साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि असहाय और वंचित लोगों की सेवा करना देवकार्य से भी बढ़कर है।
आर्थिक परिस्थितियां प्रतिभा की राह में बाधा न बनें
कैबिनेट मंत्री खजानदास ने कुसुम कान्ता जी के जीवन को याद करते हुए कहा कि उनका जीवन परिवार, साहित्य, समाज और शिक्षा के प्रति समर्पित रहा। उन्होंने कहा कि आर्थिक परिस्थितियां किसी प्रतिभाशाली विद्यार्थी की शिक्षा के रास्ते में बाधा नहीं बननी चाहिए। इस दिशा में सरकार के साथ सामाजिक संस्थाओं की भूमिका भी महत्वपूर्ण है।
पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने कहा कि शिक्षा केवल ज्ञान प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि संस्कार, संवेदना और राष्ट्र निर्माण की आधारशिला है। उन्होंने छात्रवृत्ति प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों से लक्ष्य के प्रति समर्पित रहकर निरंतर मेहनत करने और अपनी प्रतिभा का उपयोग समाज एवं राष्ट्रहित में करने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की सफलता और समाज-राष्ट्र की सेवा ही कुसुम कान्ता जी के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
महिलाओं की भूमिका को बताया महत्वपूर्ण
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहीं संस्कृत विश्वविद्यालय की पूर्व कुलपति प्रो. सुधा रानी पाण्डे ने कहा कि शिक्षा व्यक्ति के व्यक्तित्व निर्माण के साथ समाज और राष्ट्र के विकास की आधारशिला है। उन्होंने महिलाओं के सम्मान और उनके सशक्त योगदान को मजबूत परिवार, समृद्ध समाज और राष्ट्र निर्माण के लिए महत्वपूर्ण बताया।
इस अवसर पर फाउंडेशन की गतिविधियों पर आधारित दृश्य-श्रव्य प्रस्तुति भी प्रदर्शित की गई। छात्रा साक्षीता ने कविता की भावपूर्ण प्रस्तुति दी। कविता प्रतियोगिता के विजेता छात्र-छात्राओं को भी सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम का संचालन भाजयुमो के प्रदेश मंत्री एवं एडवोकेट आर्यन देव उनियाल तथा मोनिका शर्मा ने किया, जबकि संयोजन पूजा पोखरियाल ने किया।
Reported By: Arun Sharma












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