उत्तराखंड में आगामी अर्धकुंभ को “कुंभ” के रूप में प्रचारित किए जाने को लेकर राजनीति तेज हो गई है। कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता गरिमा मेहरा दसौनी ने धामी सरकार पर परंपराओं से छेड़छाड़ और जनता को गुमराह करने का गंभीर आरोप लगाया है।
गरिमा ने कहा कि शास्त्रों में कुंभ और अर्धकुंभ की स्पष्ट परिभाषा दी गई है। कुंभ मेला हर 12 वर्ष, जबकि अर्धकुंभ हर 6 वर्ष में आयोजित होता है।
उन्होंने कहा कि अर्धकुंभ को “कुंभ” बताना न केवल धार्मिक मान्यताओं का उल्लंघन है, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं के विश्वास से खिलवाड़ भी है।
गरिमा मेहरा दसौनी का आरोप सरकार धार्मिक परंपराओं का राजनीतिक लाभ के लिए उपयोग कर रही है।
भाजपा शासन में पहले ही कुंभ घोटाले से राज्य की छवि धूमिल हुई है, अब फिर भ्रम फैलाने की कोशिश हो रही है।
संत समाज भी इस निर्णय से असंतुष्ट है और मानता है कि अर्धकुंभ का पारंपरिक स्वरूप बदला नहीं जा सकता।
दसौनी ने सरकार से सवाल किया कि आखिर ऐसी जल्दबाजी क्यों? उन्होंने कहा कि धार्मिक आयोजनों को “शासन–प्रचार” का मंच बनाना स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा—
“अर्धकुंभ को अर्धकुंभ ही कहा जाएगा- सत्य, शास्त्र और परंपरा के आधार पर।”
गरिमा मेहरा दसौनी, मुख्य प्रवक्ता- उत्तराखंड कांग्रेस
Reported By: Shiv Narayan












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