उत्तराखण्ड सरकार के आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से नई टिहरी स्थित क्रीड़ा सभागार में “आपदा जोखिम न्यूनीकरण (Disaster Risk Reduction)” विषय पर जनपद स्तरीय एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास मंत्री मदन कौशिक और उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (USDMA) के सचिव विनोद कुमार सुमन मुख्य रूप से उपस्थित रहे।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास मंत्री मदन कौशिक ने कहा कि उत्तराखण्ड ने पिछले 25 वर्षों में आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किए हैं। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं की दृष्टि से संवेदनशील राज्य होने के बावजूद उत्तराखण्ड ने बेहतर समन्वय, तकनीकी संसाधनों और त्वरित राहत एवं बचाव व्यवस्था के माध्यम से आपदा प्रबंधन का एक मजबूत मॉडल विकसित किया है।
मंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल आपदाओं के दौरान राहत पहुंचाना नहीं, बल्कि आपदा जोखिम को कम करने और जनजागरूकता बढ़ाने पर भी विशेष ध्यान देना है। इसके लिए सभी विभागों के बीच बेहतर समन्वय और आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है।
कार्यशाला में जिलाधिकारी टिहरी नितिका खण्डेलवाल ने जनपद में मानसून और आपदा प्रबंधन को लेकर की गई तैयारियों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि संभावित आपदा की स्थिति से निपटने के लिए जनपद में जेसीबी मशीनों की जीपीएस लोकेशन के साथ तैनाती की गई है, ताकि आवश्यकता पड़ने पर उन्हें तुरंत घटनास्थल तक पहुंचाया जा सके।
उन्होंने बताया कि गंगा नदी क्षेत्र में किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए एसडीआरएफ की टीमों को देवप्रयाग और कीर्तिनगर में तैनात किया गया है। वहीं दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों में किसी भी आपदा की स्थिति को देखते हुए तीन माह का आवश्यक राशन पहले से ही उपलब्ध करा दिया गया है।
जिलाधिकारी ने यह भी बताया कि टिहरी बांध की सुरक्षा एवं उससे जुड़े आपदा प्रबंधन उपायों को लेकर अलग से समीक्षा बैठक आयोजित कर सभी संबंधित विभागों के साथ आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
कार्यशाला में विभिन्न विभागों के अधिकारियों, आपदा प्रबंधन विशेषज्ञों और संबंधित कर्मचारियों ने भाग लिया तथा आपदा जोखिम न्यूनीकरण, राहत एवं बचाव कार्यों को और अधिक प्रभावी बनाने पर विचार-विमर्श किया।
मदन कौशिक कैबिनेट मंत्री
Reported By: Arun Sharma












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